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कॉरपोरेट बॉन्ड: छोटे शहरों के निवेशकों को जोड़ने के लिए सेबी ने सुझाया नया 'डिस्ट्रीब्यूटर' मॉडल

भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में छोटे और खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी का इरादा…

कॉरपोरेट बॉन्ड: छोटे शहरों के निवेशकों को जोड़ने के लिए सेबी ने सुझाया नया 'डिस्ट्रीब्यूटर' मॉडल
(फोटो: IANS)

भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में छोटे और खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी का इरादा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) जैसे एक नए वितरण ढांचे को अपनाना है, ताकि फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज (स्थिर आय वाली प्रतिभूतियां) आम लोगों, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के निवासियों के लिए भी सुलभ हो सकें।

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प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 'फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स' (FICP) बनाए जाएंगे, जो निवेशकों को इन उत्पादों को समझने और खरीदने में मदद करेंगे। ये पार्टनर्स स्टॉक एक्सचेंजों में पंजीकृत होंगे और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPP) द्वारा नियुक्त किए जाएंगे।

क्यों पड़ी इस नए ढांचे की ज़रूरत?

पिछले एक दशक में कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया है। वित्त वर्ष 2014-15 के अंत में जहाँ इस बाजार का आकार लगभग 17.5 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 31 जुलाई, 2026 तक यह बढ़कर 60 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसमें से करीब 46 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड सूचीबद्ध हैं।

हालांकि, इस भारी वृद्धि के बावजूद, यह बाजार मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों तक ही सीमित रहा है। सेबी का मानना है कि मौजूदा ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म (OBPP) व्यवस्था ने खुदरा निवेशकों के लिए पहुंच तो आसान बनाई है, लेकिन बड़े शहरों से बाहर के निवेशकों को जोड़ने में एक 'संरचनात्मक कमी' बनी हुई है।

म्यूचुअल फंड की सफलता से मिली प्रेरणा

नियामक ने पाया कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में म्यूचुअल फंड की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने में डिस्ट्रीब्यूटर्स (MFD) की भूमिका बेहद सफल रही है। अब सेबी इसी मॉडल को कॉर्पोरेट बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड-इनकम उत्पादों के लिए भी अपनाना चाहता है। यह नया FICP ढांचा निवेशकों को उत्पाद की विशेषताओं, जोखिमों, दस्तावेज़ीकरण और लेनदेन में मदद करेगा।

मौजूदा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुदरा निवेशकों की रुचि बढ़ी भी है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, रिक्वेस्ट फॉर कोट (RFQ) प्लेटफॉर्म पर ट्रेड की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 के 2.76 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 17.84 लाख हो गई, जो लगभग 546% की वृद्धि है। सेबी का मानना है कि इस बढ़ोतरी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये बढ़ती खुदरा भागीदारी का बड़ा योगदान है। प्रस्तावित FICP मॉडल इस भागीदारी को और गहरा करने का काम करेगा।

कौन बन सकेगा FICP?

सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक, निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं, दोनों ही FICP बन सकते हैं। किसी व्यक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना, न्यूनतम 18 वर्ष की आयु, 12वीं कक्षा पास होना और NISM-सीरीज: फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज का वैध प्रमाणपत्र रखना जैसी शर्तें अनिवार्य होंगी।

इनपुट: IANS

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