गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिकी दबाव के बीच ईरान की कड़ी चेतावनी, साथ देने वाले देशों को 'दुश्मन' माना जाएगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर 'अब तक के सबसे कठोर आर्थिक अभियान' की घोषणा के बाद तेहरान ने सख्त रुख अपना लिया है। ईरान ने अपने पड़ोसी देशों समेत अन्य सभी राज्यों को चेतावनी दी है कि…

अमेरिकी दबाव के बीच ईरान की कड़ी चेतावनी, साथ देने वाले देशों को 'दुश्मन' माना जाएगा
(फोटो: IANS)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर 'अब तक के सबसे कठोर आर्थिक अभियान' की घोषणा के बाद तेहरान ने सख्त रुख अपना लिया है। ईरान ने अपने पड़ोसी देशों समेत अन्य सभी राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिका के इस 'आर्थिक दबाव अभियान' का हिस्सा न बनें, अन्यथा उन्हें 'दुश्मन' समझा जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात शनिवार को कही।

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ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान सबसे पहले संबंधित देशों से बातचीत कर उनसे अमेरिका की 'आर्थिक जंग' में शामिल न होने की अपील करेगा। उन्होंने साफ किया कि अगर वे देश अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो ईरान उनके हितों को निशाना बनाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख

रेजाई ने एक और बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि क्षेत्रीय देश अमेरिकी 'दबाव अभियान' का समर्थन करते हैं, तो तेहरان होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल के निर्यात की अनुमति नहीं देगा। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका, तेहरान और वाशिंगटन के बीच जून में हुए शांति समझौते (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता।

ईरानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया

यह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बुधवार को दिए गए उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने ईरान को मदद देने वाले किसी भी देश के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका का यह अभियान भी उसके पिछले जबरदस्ती वाले कदमों की तरह ही विफल होगा।

वहीं, कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इसे वाशिंगटन की पिछली विफलताओं को छिपाने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब 'आर्थिक युद्ध' के नाम पर ईरान पर और दबाव डाल रहा है, जबकि वह खुद दावा करता है कि ईरान 'पतन के कगार पर है' और इसके लिए अपने सहयोगियों से मदद मांग रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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