रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम: ऊर्जा ज़रूरतों पर भारी पड़ रहा सैन्य हथियारों पर ज़ोर - यूरोपियन टाइम्स रिपोर्ट

पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम अपनी नागरिक ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के बजाय सैन्य हथियार (वॉरहेड) बनाने को प्राथमिकता देता है। यह बात ब्रसेल्स स्थित 'यूरोपियन टाइम्स' की एक हालिया रिपोर्ट में सामने…

पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम: ऊर्जा ज़रूरतों पर भारी पड़ रहा सैन्य हथियारों पर ज़ोर - यूरोपियन टाइम्स रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम अपनी नागरिक ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के बजाय सैन्य हथियार (वॉरहेड) बनाने को प्राथमिकता देता है। यह बात ब्रसेल्स स्थित 'यूरोपियन टाइम्स' की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम की शुरुआत से ही इस पर सेना का गहरा प्रभाव रहा है, जिसके कारण परमाणु नीति और ईंधन उत्पादन से जुड़े सभी बड़े फैसले सैन्य ज़रूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

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रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि पाकिस्तान के नेताओं ने हमेशा परमाणु क्षमता को अपने बड़े पड़ोसी देश के सामने अस्तित्व की रक्षा और एक 'असमान सुरक्षा माहौल' में संतुलन साधने वाले साधन के तौर पर देखा। यही वजह है कि इसे किसी व्यापक ऊर्जा या औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा बनाने की जगह, पूरी तरह से बाहरी खतरों से प्रेरित सुरक्षा के नज़रिए से विकसित किया गया।

नागरिक और सैन्य लक्ष्यों में घालमेल

रिपोर्ट बताती है कि परमाणु तकनीक की प्रकृति दोहरे इस्तेमाल वाली होती है। जिन प्रक्रियाओं से रिएक्टर का ईंधन बनता है, उन्हीं का उपयोग हथियार बनाने लायक सामग्री तैयार करने में भी हो सकता है। पाकिस्तान में रिएक्टरों के डिज़ाइन, संवर्धन (एनरिचमेंट) और परमाणु ईंधन चक्र के प्रबंधन से जुड़े फैसले सैन्य ज़रूरतों से अत्यधिक प्रभावित रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, "जो सुविधाएं सिद्धांत रूप में नागरिक ऊर्जा उत्पादन में मदद कर सकती हैं, उन्हें इस तरह से बनाया और चलाया जाता है कि उनसे हथियार बनाने लायक सामग्री (फिसाइल मटीरियल) ज्यादा से ज्यादा मिल सके, या रणनीतिक जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सैन्य इस्तेमाल के लिए बदला जा सके।" इस वजह से देश के नागरिक और सैन्य परमाणु क्षेत्रों को अलग करके देखना मुश्किल हो जाता है।

ऊर्जा की कमी के बावजूद हथियारों पर ध्यान

पाकिस्तान में बिजली की लगातार कमी के बावजूद, देश एक मज़बूत नागरिक परमाणु क्षेत्र विकसित करने में विफल रहा है जो उसकी ऊर्जा ग्रिड की स्थिरता में योगदान दे सके। 'यूरोपियन टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बजाय सारा निवेश और राजनीतिक ध्यान रक्षा कार्यक्रमों, मिसाइल विकास और परमाणु हथियारों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर ही केंद्रित रहा है। नतीजतन, जो तकनीक देश के विकास में सहायक हो सकती थी, वह मुख्य रूप से सैन्य निवारण (डिटेरेंस) और प्रतिष्ठा के दायरे में ही सीमित रह गई है।

गैर-कानूनी परमाणु नेटवर्क के साथ इस्लामाबाद के पुराने संबंधों ने परमाणु प्रसार को रोकने के मामले में उसकी विश्वसनीयता को कम किया है, जिससे उसके परमाणु कामकाज की लगातार अंतरराष्ट्रीय जांच होती रहती है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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