रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अजीत डोभाल का चीन दौरा: सीमा विवाद और ब्रिक्स पर टिकी निगाहें, विशेषज्ञ ने बताए मायने

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के सोमवार को होने वाले चीन दौरे को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने इसे बेहद महत्वपूर्ण बताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अव्वाद का मानना…

अजीत डोभाल का चीन दौरा: सीमा विवाद और ब्रिक्स पर टिकी निगाहें, विशेषज्ञ ने बताए मायने
(फोटो: IANS)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के सोमवार को होने वाले चीन दौरे को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने इसे बेहद महत्वपूर्ण बताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अव्वाद का मानना है कि इस दौरे के दो मुख्य उद्देश्य हैं — सीमा विवाद जैसे आपसी मसलों को सुलझाना और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को आमंत्रित करना।

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विशेषज्ञ ने कहा कि भारत द्वारा हाल में उठाए गए कदम यह दर्शाते हैं कि वह एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच विश्वास बहाली और स्थिर संबंधों को लेकर उत्सुक है। अव्वाद ने कहा, "यह दौरा दो वजहों से बहुत अहम है। एक तो आपसी मसलों को सुलझाना, खासकर सीमा से जुड़े मसलों को और दूसरा शी जिनपिंग को ब्रिक्स समिट में आने के लिए बुलाना, क्योंकि अभी तक हमें नहीं पता कि वह आएंगे या नहीं।"

भारत-चीन संबंध और विश्वास बहाली

वाइल अव्वाद ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही दोनों देशों के बीच 100 प्रतिशत सहमति न हो और कुछ मतभेद बने रहें, लेकिन भारत के प्रयास चीन के साथ रिश्ते स्थिर रखने की उसकी उत्सुकता का साफ इशारा हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि ये कदम एशिया के दो बड़े देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए अहम कदम हैं।"

अमेरिका की टैरिफ नीति और भारत की चिंता

भारत-अमेरिका संबंधों पर टिप्पणी करते हुए अव्वाद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति भारत सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकती है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पड़ोसी देशों और यहां तक ​​कि सहयोगी देशों पर भी टैरिफ लगाने से मुझे लगता है कि यह भारत सरकार के लिए चिंता की बात है कि वह टैरिफ के मामलों में भारत पर दबाव डालने की अपनी नीति जारी रख सकते हैं, जिसका भारत को सामना करना पड़ेगा।" अव्वाद का मानना है कि यह नीति अंततः खत्म होनी चाहिए क्योंकि यह सहयोगियों के बीच विश्वास को कम करती है, जैसा कि कनाडा के मामले में देखा गया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ट्रंप का रुख

अव्वाद ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अमेरिकी दावों की भी आलोचना की। उन्होंने ट्रंप की कूटनीति को 'काउबॉय डिप्लोमेसी' करार देते हुए कहा, "मुझे लगता है कि वह दुनिया को रहने के लिए और खतरनाक जगह बना रहे हैं।" विशेषज्ञ के अनुसार, ट्रंप का यह कदम साबित करता है कि ईरान के साथ उनका टकराव कभी भी परमाणु मुद्दे को लेकर नहीं था, बल्कि इसके पीछे इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका थी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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