SCO शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान पहुंचे, द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने पर ज़ोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रविवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बिश्केक के मानस…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रविवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बिश्केक के मानस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स के चेयरमैन आदिलबेक कासिमालिएव ने उनका स्वागत किया। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई द्विपक्षीय बैठकों में भी शामिल होंगे।
अपनी दो-दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने एक बयान जारी कर एससीओ में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "भारत 2017 से एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है।" पीएम मोदी ने कहा कि वह सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
आतंकवाद के खिलाफ़ साझा प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ को पड़ोस और उससे बाहर शांति व स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की अपनी उत्सुकता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य इन बुराइयों से मुक्त क्षेत्र के निर्माण के लिए सहयोग करना है। अपनी यात्रा के दौरान वे किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव और एससीओ के अन्य नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक उत्सव
किर्गिस्तान के निवेश मंत्री ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को एक "बहुत ही महत्वपूर्ण घटना" बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों, निवेश और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। मंत्री के अनुसार, किर्गिस्तान इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और कृषि-उद्योग जैसे क्षेत्रों में अधिक भारतीय कंपनियों को आकर्षित करना चाहता है। 2024 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 91 मिलियन डॉलर रहा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे, जिसे उन्होंने मध्य एशिया की समृद्ध जीवित विरासत का उत्सव बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी।
इनपुट: IANS



