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NSE IPO: निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया के बावजूद ग्रे मार्केट में उत्साह क्यों हुआ कम?

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को निवेशकों का भरपूर समर्थन मिला है, लेकिन लिस्टिंग से ठीक पहले इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में बड़ी गिरावट…

NSE IPO: निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया के बावजूद ग्रे मार्केट में उत्साह क्यों हुआ कम?
(फोटो: IANS)

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को निवेशकों का भरपूर समर्थन मिला है, लेकिन लिस्टिंग से ठीक पहले इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में बड़ी गिरावट देखी गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट 60 प्रतिशत से भी ज़्यादा है, जिसने बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

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ग्रे मार्केट, जो किसी आईपीओ के प्रति अनौपचारिक बाज़ार के रुझान का संकेतक माना जाता है, वहाँ NSE के शेयर का प्रीमियम अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, जो GMP को ट्रैक करते हैं, शनिवार को यह प्रीमियम 218 रुपये के शिखर पर था, जो शुक्रवार दोपहर तक घटकर महज़ 84 रुपये रह गया। यह लगभग 61.46% की भारी गिरावट दर्शाता है।

निवेशकों का उत्साह बरकरार

ग्रे मार्केट की इस सुस्ती के बावजूद, NSE के 22,569 करोड़ रुपये के इस आईपीओ को निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, बोली के दूसरे दिन (शुक्रवार को) ही यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। आईपीओ में बिक्री के लिए रखे गए 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं।

NSE के वित्तीय आंकड़े और IPO की संरचना

यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही है। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक ही 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि इस बिक्री से मिलने वाली रकम कंपनी के खाते में नहीं जाएगी। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है, जिसके ऊपरी स्तर पर इसका बाज़ार पूंजीकरण (Market Cap) करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये होगा।

हालांकि, एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन में हाल में कुछ नरमी देखी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका परिचालन राजस्व 16,601.31 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 17,140.67 करोड़ रुपये से 3% कम है। इसी तरह, ट्रांजैक्शन शुल्क से होने वाली आय भी लगभग 4% घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई।

आगे क्या होगा?

बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक अनुमान होता है और यह शेयर की लिस्टिंग कीमत की कोई गारंटी नहीं देता। अब सभी की निगाहें आईपीओ के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और 24 सितंबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर टिकी हैं। उसी दिन यह साफ होगा कि निवेशक इस इश्यू को लेकर असल में कितने उत्साहित हैं। यह सार्वजनिक निर्गम 21 सितंबर को बंद होगा।

इनपुट: IANS

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