शनिवार, 19 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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लगातार छठे हफ़्ते गिरावट में भारतीय शेयर बाज़ार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी वजह

ऊँची ब्याज दरों की आशंका और वैश्विक तनावों के बीच भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार छठे हफ़्ते गिरावट का दौर जारी रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी…

लगातार छठे हफ़्ते गिरावट में भारतीय शेयर बाज़ार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी वजह
(फोटो: IANS)

ऊँची ब्याज दरों की आशंका और वैश्विक तनावों के बीच भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार छठे हफ़्ते गिरावट का दौर जारी रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 0.65% तक की साप्ताहिक कमजोरी दर्ज की गई।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिकवाली के दबाव ने रुपये को भी कमज़ोर किया और बाज़ार की रिकवरी की कोशिशों को सीमित कर दिया। हालाँकि, हफ़्ते के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की तरफ़ से की गई भारी ख़रीदारी ने बाज़ार को कुछ हद तक सँभाला और बड़ी गिरावट को रोकने में मदद की।

साप्ताहिक प्रदर्शन और प्रमुख आँकड़े

इस कारोबारी हफ़्ते के अंत में सेंसेक्स 0.65% गिरकर 74,294 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22% की गिरावट के साथ 23,346 अंक पर रहा। शुक्रवार को सेंसेक्स में 19 अंकों की मामूली गिरावट आई, लेकिन निफ्टी में 0.33% की बढ़त देखने को मिली। हफ़्ते की शुरुआत तो कमज़ोर रही, पर बाद में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से बाज़ार में थोड़ी रिकवरी हुई।

एक्सचेंज के आँकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने लगातार पाँचवें हफ़्ते बिकवाली करते हुए 7,620 करोड़ रुपये निकाले। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11,232 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। इस महीने अब तक FII ने कुल 7,041 करोड़ रुपये की बिक्री की है, जबकि DII ने 36,219 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

बाज़ार पर किन वजहों का रहा असर?

बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंकों के फ़ैसले उम्मीद के मुताबिक ही थे, लेकिन उनकी टिप्पणियों से यह संकेत मिला कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति सख़्त बनी रह सकती है। इससे लंबे समय तक ऊँची ब्याज दरें बने रहने की संभावना है, जो निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय है।

सेक्टरों के लिहाज़ से देखें तो हेल्थकेयर और FMCG शेयरों में ख़रीदारी दिखी, जिन्हें उनकी स्थिर आय और घरेलू मांग से सहारा मिला। रियल्टी और मेटल शेयर भी मज़बूत रहे। वहीं, आईटी सेक्टर पर दबाव बना रहा और निफ्टी आईटी सूचकांक में लगभग 1% की गिरावट आई।

आगे कैसी रह सकती है बाज़ार की चाल

विश्लेषकों के अनुसार, छोटे और मझोले शेयरों (मिडकैप और स्मॉलकैप) ने बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निवेशकों ने ऐसी घरेलू कंपनियों में रुचि दिखाई जिनकी कमाई की संभावनाएँ, ऑर्डर बुक और बैलेंस शीट मज़बूत हैं।

तकनीकी नज़रिए से, निफ्टी के लिए 23,000-23,100 अंक का स्तर एक मज़बूत सपोर्ट ज़ोन बना हुआ है, जबकि 23,400-23,600 का स्तर एक बड़ी बाधा (रेजिस्टेंस) के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में निवेशकों की नज़र घरेलू क्रेडिट ग्रोथ, PMI आँकड़ों और अमेरिकी बेरोज़गारी के आँकड़ों पर रहेगी, जो बाज़ार की दिशा तय करने में अहम होंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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