बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाज़ार की नई क्लोजिंग व्यवस्था पर सेबी प्रमुख ने दिया भरोसा, कहा- हेरफेर का कोई सबूत नहीं

शेयर बाज़ारों में पिछले हफ्ते लागू की गई नई 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) व्यवस्था को लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सेबी प्रमुख…

शेयर बाज़ार की नई क्लोजिंग व्यवस्था पर सेबी प्रमुख ने दिया भरोसा, कहा- हेरफेर का कोई सबूत नहीं
(फोटो: IANS)

शेयर बाज़ारों में पिछले हफ्ते लागू की गई नई 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) व्यवस्था को लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को कहा कि इस नई प्रणाली में किसी भी तरह की हेरफेर या गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने इसे भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा और ज़रूरी सुधार बताया।

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मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान पांडे ने ज़ोर देकर कहा कि यह व्यवस्था भारत के बाज़ारों को वैश्विक मानकों के करीब लाती है। उन्होंने कहा, "सीएएस बाज़ार की माइक्रोस्ट्रक्चर में एक बहुत बड़ा सुधार है और हम इसके पीछे मज़बूती से खड़े हैं।" उनके मुताबिक, यह कोई नई अवधारणा नहीं है; दुनिया के कई प्रमुख बाज़ार जैसे अमेरिका, जर्मनी, हॉन्गकॉन्ग और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जापान ने भी 2024 में इसे लागू किया था।

क्या है क्लोजिंग ऑक्शन और यह क्यों ज़रूरी है?

यह एक नई प्रणाली है जिसमें नियमित ट्रेडिंग खत्म होने के बाद 20 मिनट का एक विशेष सत्र होता है। इस दौरान शेयरों के खरीद और बिक्री के ऑर्डर जमा किए जाते हैं और एक ऐसे मूल्य पर क्लोजिंग प्राइस तय होता है, जहाँ सबसे ज़्यादा सौदों का मिलान हो सके। इसका मुख्य उद्देश्य दिन के अंत में शेयरों का एक सटीक और निष्पक्ष मूल्य तय करना है।

सेबी प्रमुख के मुताबिक, शेयरों का क्लोजिंग प्राइस बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी के आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे सूचकांकों, पैसिव निवेश उत्पादों और म्यूचुअल फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) की गणना की जाती है। पुरानी व्यवस्था में क्लोजिंग प्राइस दिन के आखिरी 30 मिनट के कारोबार के औसत मूल्य (वेटेड एवरेज) पर तय होता था।

फिलहाल फोकस भागीदारी बढ़ाने पर

तुहिन कांत पांडे ने माना कि अभी इस नई व्यवस्था में बाज़ार की भागीदारी बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "कई ब्रोकरों ने संकेत दिए हैं कि भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है।" सेबी प्रमुख ने इसे एक पारदर्शी व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसमें कीमतों का निर्धारण एक खुली प्रक्रिया से होता है, जहाँ हर गतिविधि देखी जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि सेबी लगातार ब्रोकरों और निवेशकों जैसे सभी हितधारकों से संपर्क में है और उनके सुझावों पर विचार कर रहा है। पांडे ने भरोसा जताया कि जैसे-जैसे लोग इस प्रणाली को समझेंगे, यह भारतीय बाज़ार के लिए एक सफल सुधार साबित होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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