बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय निर्यात में उछाल: जुलाई-सितंबर तिमाही में 17.6% वृद्धि की उम्मीद, 131.2 अरब डॉलर तक पहुंचेगा आंकड़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत के वस्तु निर्यात में एक बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है। इंडिया एग्जिम बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में निर्यात पिछले साल की…

भारतीय निर्यात में उछाल: जुलाई-सितंबर तिमाही में 17.6% वृद्धि की उम्मीद, 131.2 अरब डॉलर तक पहुंचेगा आंकड़ा
(फोटो: IANS)

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत के वस्तु निर्यात में एक बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है। इंडिया एग्जिम बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में निर्यात पिछले साल की तुलना में 17.6 प्रतिशत बढ़कर 131.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी इन आंकड़ों से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक तस्वीर उभरती है।

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यह लगातार दूसरी तिमाही होगी जब निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की जाएगी। इससे पहले, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी वस्तु निर्यात 16.1 प्रतिशत की शानदार वृद्धि के साथ 129.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 111.6 अरब डॉलर था।

गैर-तेल निर्यात में भी भारी बढ़त

रिपोर्ट के अनुसार, कुल निर्यात के साथ-साथ गैर-तेल श्रेणी में भी जबरदस्त उछाल का अनुमान है। जुलाई-सितंबर तिमाही में गैर-तेल निर्यात 20.3 प्रतिशत बढ़कर 113.8 अरब डॉलर हो सकता है। वहीं, अगर इसमें से रत्न एवं आभूषण को भी हटा दिया जाए, तो यह आंकड़ा 20.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 105.8 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में मजबूती का संकेत है।

निर्यात वृद्धि के पीछे क्या हैं कारण?

इंडिया एग्जिम बैंक ने इस सकारात्मक रुझान के पीछे कई वजहें बताई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने निर्यात के लिए नए बाज़ारों में पहुंच बना रहा है, जिससे भौगोलिक विविधीकरण बढ़ रहा है। साथ ही, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ हुए नए व्यापार समझौते भी अनुकूल माहौल बना रहे हैं। इसके अलावा, घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में लगातार हो रहा विस्तार और साझेदार देशों में भारतीय सामान की मजबूत मांग भी इस वृद्धि को सहारा दे रही है।

चुनौतियां और व्यापार घाटा

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ संभावित जोखिमों की ओर भी इशारा किया गया है। बैंक के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में उतार-चढ़ाव निर्यात के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हाल ही में व्यापार घाटे को लेकर कुछ चिंताएं जताई गई थीं। जून 2026 में वस्तु व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर के पांच महीने के उच्चतम स्तर पर था, लेकिन सरकार ने इसे पिछले 12 महीनों के 29.3 अरब डॉलर के औसत के करीब बताया है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में कहा था कि सरकार व्यापार घाटे सहित देश के व्यापार प्रदर्शन पर लगातार नजर बनाए हुए है।

इनपुट: IANS

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