NEET पेपर लीक: 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, CBI ने मांगी आगे की जांच की इजाजत
बहुचर्चित नीट-यूजी पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर की गई 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विशेष…
बहुचर्चित नीट-यूजी पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर की गई 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विशेष अदालत 13 अगस्त से आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर सुनवाई शुरू करेगी। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी आगे की जांच के लिए CBI द्वारा दायर एक अर्जी पर आरोपियों से जवाब भी मांगा है।
इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार के नाम शामिल हैं।
मीडिया की भूमिका और गवाहों की सुरक्षा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद मीडिया में गवाहों के नाम छपने पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत चौंकाने वाला है कि जो बात अभी तक कोर्ट में नहीं बोली गई है, वह अभी चार्जशीट का हिस्सा है। यह सब मीडिया में सामने आना बेहद चौंकाने वाला है।" कोर्ट ने टिप्पणी की कि मीडिया की भी जिम्मेदारी बनती है और ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। CBI ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ गवाह नाबालिग भी हो सकते हैं और चार्जशीट के अंश लगातार अखबारों में छापे जा रहे हैं।
कैसे लीक हुआ था पेपर?
CBI ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि तीन विषय विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के दिल्ली स्थित कार्यालय से गोपनीय तरीके से प्रश्नपत्रों को बाहर निकाला था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय उनकी तलाशी नहीं ली जाती थी।
चार्जशीट में NTA की सुरक्षा खामियों का भी जिक्र है। बताया गया है कि गोपनीय अनुभाग में प्रवेश या निकास के दौरान विशेषज्ञों की जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा, गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई समर्पित सीसीटीवी लाइव फीड निगरानी नियंत्रण कक्ष भी नहीं था, जिससे विशेषज्ञों की हरकतें पकड़ में नहीं आ सकीं।
पेपर लीक करने के अलग-अलग तरीके
जांच एजेंसी ने बताया कि एक आरोपी प्रहलाद कुलकर्णी ने रफ काम के लिए दी गई सादी शीट पर रसायन विज्ञान के सभी 135 सवाल और उनके विकल्प लिख लिए थे। वहीं, दो अन्य आरोपियों ने प्रश्नों को याद कर लिया और बाद में होटल के कमरे में जाकर उन्हें लिखा या पाठ्यपुस्तकों में संबंधित हिस्सों को चिह्नित किया। CBI के अनुसार, जीव विज्ञान के प्रश्नपत्र को 20 और 21 अप्रैल 2026 को टाइप किया गया था, जिसके लिए नोट्स की फोटोकॉपी का इस्तेमाल हुआ था।
इनपुट: IANS



