तृणमूल कांग्रेस के नाम-निशान पर चुनाव आयोग की रोक, दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए देने होंगे नए विकल्प
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके 'घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के कारण आया है, जिसका असर…
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके 'घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के कारण आया है, जिसका असर अक्टूबर में होने वाले विधानसभा उपचुनावों पर भी पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार देर रात लिए गए इस फैसले के बाद अब दोनों खेमों को नए नाम और निशान के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
यह निर्णय पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से ठीक पहले आया है। इन चुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार, जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक कोई भी गुट 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन किए गए चिह्न का उपयोग नहीं कर पाएगा।
नए नाम-निशान के लिए समय सीमा
आयोग ने दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न सौंपने का निर्देश दिया है। इन्हीं विकल्पों में से आयोग दोनों को उपचुनावों के लिए एक-एक नाम और निशान आवंटित करेगा। यदि कोई भी गुट निर्धारित समय सीमा का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे इन उपचुनावों से बाहर कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस में दो धड़े बन गए हैं। एक का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं, जिसे 'मूल लेकिन अल्पमत' वाला गुट बताया जा रहा है। वहीं, दूसरा गुट पार्टी से निकाले गए विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में है, जो 'बागी लेकिन बहुमत' वाला होने का दावा करता है।
फैसले पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश पर दोनों गुटों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। ममता बनर्जी खेमे के तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे 'असंवैधानिक' करार दिया। उन्होंने कहा, "चूंकि आयोग का आदेश असंवैधानिक है, इसलिए हमारा गुट इसे स्वीकार नहीं कर रहा है। जैसे अवैध चीजों को अस्थायी रूप से स्वीकार करना पड़ता है, इसे भी स्वीकार करना पड़ेगा।" उन्होंने यह भी बताया कि वे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक चुनाव चिह्न का विकल्प देंगे।
दूसरी ओर, रितब्रत बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "चिह्न और नाम को लेकर जो कहानी चल रही थी, चुनाव आयोग के आज के अंतरिम आदेश से साबित होता है कि वंशवादी राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। राजनीतिक दल कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है, न ही किसी राजनीतिक दल का कोई उत्तराधिकारी हो सकता है।"
1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनी तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की थी। अब 2026 में पहली बार राज्य में चुनाव बिना इसके मूल नाम और चिह्न के होंगे।
इनपुट: IANS



