जीरो FIR: राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया महिलाओं का अहम अधिकार, पुलिस की ना-नुकर पर भी दिया सुझाव
अगर कोई संज्ञेय अपराध किसी महिला के साथ होता है, तो वह घटना की जगह से दूर किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने रविवार को महिलाओं को…
अगर कोई संज्ञेय अपराध किसी महिला के साथ होता है, तो वह घटना की जगह से दूर किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने रविवार को महिलाओं को उनके इस महत्वपूर्ण अधिकार, जिसे 'जीरो एफआईआर' कहा जाता है, के बारे में जागरूक किया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, रहाटकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरो एफआईआर दर्ज कराना हर महिला का अधिकार है। एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद, मामले को स्वतः ही संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, तो महिलाओं को लिखित शिकायत देकर किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। अपने पोस्ट के साथ उन्होंने एक पैम्फलेट भी साझा किया, जिसमें गंभीर अपराध की स्थिति में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई गई है।
महाराष्ट्र में महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण
विजया रहाटकर का यह संदेश महाराष्ट्र में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला के ठीक एक दिन बाद आया। शनिवार को उन्होंने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक क्षमता-निर्माण कार्यशाला की अध्यक्षता की थी। यह कार्यक्रम 'शी इज अ चेंज मेकर' पहल के तहत एमजीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित किया गया था।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने यह आयोजन यशवंतराव चव्हाण एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन के सहयोग से किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जमीनी स्तर पर शासन में महिला नेतृत्व को मजबूत करना था। रहाटकर ने बताया कि इस पहल के तहत महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से पूरे राज्य में 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हुई।
कार्यशाला का उद्देश्य और भागीदारी
पहले शिविर में छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों की 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और नगर निकायों की निर्वाचित महिलाएं शामिल थीं। रहाटकर के अनुसार, कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की गहरी समझ हो और वे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर सकें। साथ ही, उन्हें सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करने और अपने कौशल को लगातार बढ़ाने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया।
इनपुट: IANS



