टोंक जेल में बंद नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द की शिकायत के बाद ICU में भर्ती
एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में टोंक जेल में बंद स्वतंत्र नेता नरेश मीणा की तबीयत शनिवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती कराना पड़ा। मीणा के…
एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में टोंक जेल में बंद स्वतंत्र नेता नरेश मीणा की तबीयत शनिवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में भर्ती कराना पड़ा। मीणा के अस्पताल में भर्ती होने की खबर फैलते ही उनके समर्थक अस्पताल के बाहर जमा हो गए, जिससे एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मीणा ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सीने में दर्द की शिकायत की थी। जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें 12:28 बजे सआदत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ICU में भर्ती कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि उनकी ईसीजी रिपोर्ट सामान्य आई है, लेकिन रक्त जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
समर्थकों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया
मीणा के अस्पताल पहुंचने के साथ ही उनके समर्थकों ने जेल में दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठाए। पूर्व सरपंच आरडी गुर्जर ने आरोप लगाया कि मीणा पिछले एक हफ्ते से सीने और पीठ दर्द से परेशान थे, लेकिन उन्हें समय पर इलाज मुहैया नहीं कराया गया। उन्होंने सरकार और जेल प्रशासन पर मीणा की जान को खतरे में डालने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
गुर्जर ने यह भी बताया कि 22 अगस्त को जब पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने जेल में मीणा से मुलाकात की थी, तब भी उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की थी। गुढ़ा ने बाद में मीडिया से कहा था कि मीणा अस्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है।
स्वास्थ्य को लेकर पहले भी जताई गई थी चिंता
नरेश मीणा के स्वास्थ्य को लेकर पहले भी चिंताएं व्यक्त की जा चुकी हैं। दिवंगत गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला की बेटी सुनीता बैंसला ने 25 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था कि मीणा की सीने में दर्द और चक्कर आने की शिकायतें चिंताजनक हैं। उन्होंने राजस्थान सरकार से उनकी पूरी जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने की अपील की थी। फिलहाल, डॉक्टर सभी जांच रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आगे के इलाज की दिशा तय करेंगे। इसी के बाद यह फैसला भी होगा कि उन्हें टोंक में ही रखा जाएगा या बेहतर इलाज के लिए जयपुर भेजा जाएगा।
इनपुट: IANS



