'वंदे मातरम' पर कानून को पी. चिदंबरम ने बताया 'अनावश्यक विवाद', सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने 'वंदे मातरम' को लेकर लाए गए एक नए कानूनी संशोधन की कड़ी आलोचना की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मदुरै में एक कार्यक्रम को संबोधि…
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने 'वंदे मातरम' को लेकर लाए गए एक नए कानूनी संशोधन की कड़ी आलोचना की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मदुरै में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने इस पूरे विवाद को अनावश्यक और शरारतपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गैर-जरूरी मुद्दों को उठाकर एक नया विवाद पैदा कर रही है।
चिदंबरम का यह बयान राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में आया है, जिसे हाल ही में समाप्त हुए संसद के मानसून सत्र में पारित किया गया था। इस संशोधन के बाद राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 का दायरा बढ़ गया है, जिसमें अब 'वंदे मातरम' भी शामिल है। इसके तहत अब जानबूझकर 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालने या इसे गाने वाली किसी सभा में व्यवधान पैदा करने पर दंड का प्रावधान किया गया है।
विधेयक पारित करने की प्रक्रिया पर आपत्ति
राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने इस विधेयक को पारित करने के तरीके पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इसे दोपहर 1:30 बजे पेश किया गया और बिना किसी पर्याप्त चर्चा के सिर्फ पांच मिनट के भीतर ही मंजूरी दे दी गई। उन्होंने इस विधेयक को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के साथ 'शरारतपूर्ण' करार दिया। चिदंबरम के मुताबिक, मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित हुए, जिनमें यह भी शामिल था।
'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक संदर्भ
गीत के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए चिदंबरम ने कहा कि इसके पहले दो अंतरे राष्ट्र की वंदना करते हैं, जबकि बाकी के चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से स्वतंत्रता से पहले इस पर मतभेद थे। कांग्रेस कार्यसमिति ने इस पर गहन विचार-विमर्श किया था, जिसमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता शामिल थे।
उन्होंने कहा, “रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएं, क्योंकि वे पर्याप्त हैं।” चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदू महासभा, आरएसएस या जनसंघ द्वारा 'वंदे मातरम' गाए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिलता, जबकि उस दौर के कई दस्तावेज मौजूद हैं।
व्यावहारिक चुनौतियां और सवाल
कांग्रेस नेता ने व्यावहारिक पक्ष की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के सभी छह अंतरे गाने में लगभग तीन मिनट का समय लगेगा। यदि किसी कार्यक्रम में इसे तमिल थाई वाझ्थु और राष्ट्रगान के साथ गाया जाए, तो लोगों को करीब पांच मिनट तक खड़े रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि बहुत कम राजनीतिक कार्यकर्ता इसके स्वीकृत दो अंतरे भी पूरा गा सकते हैं, और पूरा गीत जानने वालों की संख्या तो और भी कम है।
इनपुट: IANS



