मध्य प्रदेश में लड़कियों के लापता होने के मामले बढ़े, 5 साल में 61,000 से ज्यादा हुईं गुम
मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान 61,000 से अधिक लड़कियों के लापता होने की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने…
मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान 61,000 से अधिक लड़कियों के लापता होने की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। आंकड़ों से पता चलता है कि इन 61,112 लड़कियों में से 3,241 अब भी लापता हैं।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि लापता नाबालिग लड़कियों के सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 'अपहरण' के तौर पर दर्ज किया जाता है। इसका उद्देश्य पुलिस जांच में किसी भी तरह की ढिलाई को रोकना और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
साल-दर-साल बढ़ते मामले
विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़े लड़कियों के लापता होने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं। साल 2021 में 9,407 मामले दर्ज हुए, जबकि 2022 में यह संख्या 9,093 रही। इसके बाद 2023 में 11,250, 2024 में 11,907 और 2025 में सर्वाधिक 13,146 मामले सामने आए।
हालांकि, इसी अवधि में पुलिस ने बड़ी संख्या में लड़कियों को ढूंढ निकालने में सफलता भी हासिल की। मुख्यमंत्री के जवाब के अनुसार, कुल 61,498 लड़कियों को सुरक्षित बरामद किया गया, जिसमें 2021 से पहले के कई लंबित मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2021 की शुरुआत में 3,627 मामले पहले से ही लंबित थे।
सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार लड़कियों के अपहरण और तस्करी को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में 'ऑपरेशन मुस्कान' जैसा बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत, विशेष रूप से लड़कियों पर केंद्रित 'ऑपरेशन सृजन' और लड़कों के लिए 'ऑपरेशन अभिमन्यु' संचालित किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक उपाय: मामलों की प्रगति की निगरानी और लापता बच्चों की तेजी से बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो' का गठन किया गया है और प्रदेश के सभी 52 महिला पुलिस थानों में विशेष 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' स्थापित की गई हैं।
आंकड़ों के अनुसार, यह चुनौती अभी भी बनी हुई है, क्योंकि सिर्फ 2026 के पहले पांच महीनों में ही 6,309 नए मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनकी जांच और तलाशी अभियान जारी है।
इनपुट: IANS



