सोमवार, 20 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

मानसून सत्र से पहले मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला, समान नागरिक संहिता समेत 9 अहम विधेयकों को मंजूरी

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कई बड़े विधायी सुधारों की नींव रख दी है। भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट की एक विशेष बैठक में नौ…

मानसून सत्र से पहले मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला, समान नागरिक संहिता समेत 9 अहम विधेयकों को मंजूरी
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कई बड़े विधायी सुधारों की नींव रख दी है। भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट की एक विशेष बैठक में नौ महत्वपूर्ण विधेयकों के मसौदे को मंजूरी दी गई, जिन्हें 20 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद प्रदेश में शासन-प्रशासन को आधुनिक बनाना, नियमों को सरल करना और शिक्षा, उद्योग व जनकल्याण के क्षेत्रों में सुधार लाना है।

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समान नागरिक संहिता (UCC) पर अहम कदम

कैबिनेट के सबसे चर्चित फैसलों में 'मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026' को दी गई मंजूरी शामिल है। इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करना है। हालांकि, जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके प्रावधानों में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करना और संपत्ति में महिलाओं व पुरुषों को बराबर का अधिकार देना भी शामिल है। इस कदम से मध्य प्रदेश ऐसे सुधार लागू करने वाले चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।

शिक्षा और उद्योग के लिए नए नियम

शिक्षा के क्षेत्र में भी दो बड़े बदलावों को मंजूरी मिली है। 'निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026' के तहत अब यूनिवर्सिटी खोलने के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्य शर्त को हटाकर 'पर्याप्त भूमि' का प्रावधान किया गया है। इससे शहरों में बहुमंजिला परिसरों में भी विश्वविद्यालय स्थापित हो सकेंगे। वहीं, 'मध्य प्रदेश निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण एवं विनियमन) विधेयक, 2026' के जरिए कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने की तैयारी है। इसके तहत 11वीं कक्षा से नीचे के छात्रों का कोचिंग में दाखिला प्रतिबंधित होगा, संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और फीस वापसी के लिए 10 दिन की समय-सीमा तय की गई है।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' को और प्रभावी बनाया गया है। इसके तहत एक विशेष सचिवालय बनेगा जो निवेशकों को स्व-घोषणा पर 'लेटर ऑफ एस्टैब्लिशमेंट' जारी करेगा। साथ ही, उद्योग लगाने के शुरुआती चरण में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमाणपत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

अन्य महत्वपूर्ण विधेयक और संशोधन

इनके अलावा, कैबिनेट ने छह पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 'मध्य प्रदेश श्रम संहिता, 2026' को भी मंजूरी दी, जिससे थिएटर और रेस्तरां 24 घंटे तीन शिफ्ट में चल सकेंगे। अन्य स्वीकृत विधेयकों में 'मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026', 'फायर एक्ट, 2026', 'धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक' और 'मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, 2026' शामिल हैं। साथ ही, 'पंचायत राज एवं उपकर (सेस) अधिनियम' में संशोधन कर स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को संपत्ति पंजीकरण पर लगने वाले उपकर से छूट दी गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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