असम में शिक्षा की दोहरी चुनौती: 32 हजार स्कूलों में छात्र कम, 60 हजार शिक्षकों के पद खाली
असम के हजारों सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ 32,000 से ज्यादा स्कूलों में छात्रों की संख्या चिंताजनक रूप से कम है, तो वहीं दूसरी ओर राज्य भर में शिक्षकों के 60,000 से अध
असम के हजारों सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ 32,000 से ज्यादा स्कूलों में छात्रों की संख्या चिंताजनक रूप से कम है, तो वहीं दूसरी ओर राज्य भर में शिक्षकों के 60,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी असम सरकार ने विधानसभा में पेश की, जिससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्य सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों की भारी कमी और लगातार घटती छात्र संख्या की चुनौतियों से एक साथ जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 32,321 स्कूलों में 30 से भी कम छात्र नामांकित हैं। इसके अलावा, 60,032 शिक्षकों के पद रिक्त होने से मौजूदा शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ गया है और पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रांतीयकरण की मांग और सरकारी प्रक्रिया
इन चुनौतियों के बावजूद, राज्य के लगभग 25 हजार शैक्षणिक संस्थानों ने सरकार से प्रांतीयकरण की मांग की है। शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने सदन को बताया कि इसके लिए खोले गए ऑनलाइन पोर्टल पर हजारों आवेदन आए हैं। इनमें 6,163 लोअर प्राइमरी स्कूल, 10,101 अपर प्राइमरी स्कूल, 5,733 हाई स्कूल और 1,222 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। पेगू के अनुसार, इन आवेदनों की जांच संबंधित शिक्षा अधिनियम और नियमों के तहत की जा रही है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों से यह भी पता चला कि 7,948 स्कूलों में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन नहीं हो पा रहा है। इस असंतुलन के कारण कक्षाओं का संचालन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि यह स्थिति सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के रास्ते में एक बड़ी बाधा है।
सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भर्ती अदालती निर्देशों और राज्य की नीति के अनुसार की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, खाली पदों को भरने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
इनपुट: IANS



