मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाज़ार: चार दिनों की तेजी के बाद फिसले सेंसेक्स-निफ्टी, आईटी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर मंगलवार को विराम लग गया। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और वित्तीय शेयरों में बिकवाली…

शेयर बाज़ार: चार दिनों की तेजी के बाद फिसले सेंसेक्स-निफ्टी, आईटी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
(फोटो: IANS)

लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर मंगलवार को विराम लग गया। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और वित्तीय शेयरों में बिकवाली का दबाव मुख्य कारण रहा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट के चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।

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मंगलवार को बाजार बंद होने पर, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44% की गिरावट के साथ 74,529.08 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 सूचकांक 85.30 अंक या 0.36% फिसलकर 23,329.00 पर बंद हुआ।

छोटे-मझोले शेयरों का हाल

व्यापक बाजारों (broader markets) पर नजर डालें तो वहां भी कमजोरी का रुख रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.08% की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23% नीचे आकर बंद हुआ।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन

सेक्टरवार प्रदर्शन में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी आईटी, सीमेंट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में दर्ज की गई। इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया, रियल्टी और मेटल के शेयरों में निवेशकों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ये हरे निशान में बंद हुए।

अगर निफ्टी50 इंडेक्स के शेयरों की बात करें तो कोल इंडिया का शेयर 3.2% की बढ़त के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज के शेयर भी टॉप गेनर्स की सूची में शामिल थे। वहीं, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।

बाजार पर बाहरी कारकों का दबाव

एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कुछ कारक बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से 99-100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। विशेषज्ञ ने बताया कि विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिसका असर सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञ ने निवेशकों को सलाह दी कि निफ्टी के 23,300–23,350 के जोन में रहने के कारण, उन्हें छोटी अवधि की तेजी के पीछे भागने से बचना चाहिए। उन्होंने मजबूत कमाई की संभावना वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने और बाजार में बड़ी गिरावट का फायदा उठाने के लिए नकदी बनाए रखने की सलाह दी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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