मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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वैश्विक चुनौतियों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए भारत समेत 7 देश और यूरोपीय संघ एक साथ आए

दुनिया जब बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्ष और दबाव की राजनीति जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब भारत ने सात अन्य देशों और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर एक नई पहल की शुरुआत की है। न्यूयॉर्क में संयुक्…

वैश्विक चुनौतियों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए भारत समेत 7 देश और यूरोपीय संघ एक साथ आए
(फोटो: IANS)

दुनिया जब बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्ष और दबाव की राजनीति जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब भारत ने सात अन्य देशों और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर एक नई पहल की शुरुआत की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' (P4M) नामक इस मंच का उद्घाटन किया गया, जिसका मकसद वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार लाना है।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पहले P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस पहल के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, केन्या और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इसका लक्ष्य विभिन्न महाद्वीपों के देशों को एक मंच पर लाकर शांति और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देना है।

क्यों पड़ी इस पहल की ज़रूरत?

सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की गई। इसमें कहा गया कि दुनिया बड़े बदलावों के दौर से गुज़र रही है और बढ़ते संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन तथा संरक्षणवाद जैसी प्रवृत्तियाँ वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। घोषणापत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित व्यवस्था आज भी ज़रूरी है, लेकिन इसे वर्तमान की जटिल और बहुध्रुवीय दुनिया के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है।

भारत का पक्ष और वैश्विक सुधार पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और ऐसे समय में बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका को और मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा, "अधिक सहभागी विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता है।" जयशंकर ने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की बात भी कही, ताकि किसी एक क्षेत्र में रुकावट का असर पूरी दुनिया पर न पड़े।

P4M पहल में संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया है। घोषणापत्र में इन संस्थाओं को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने की ज़रूरत पर बल दिया गया और UN80 जैसी पहलों के ज़रिए सुधारों का समर्थन किया गया।

साझा सिद्धांत और भविष्य की राह

इस नई पहल के तहत सभी सह-प्रायोजक देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि कोई भी देश अकेले वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता और P4M साझा सिद्धांतों को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा। यह पहल अन्य देशों के लिए भी खुली रहेगी और सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए एक समन्वय तंत्र भी बनाया जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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