Milky Mist IPO: कंपनी ने प्रॉस्पेक्टस में गिनाए बड़े जोखिम — दक्षिण भारत पर निर्भरता से लेकर ₹229 करोड़ की देनदारियां
डेयरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड (Milky Mist Dairy Food Ltd) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेशकों के लिए खुला है। लेकिन इस निवेश से पहले, कंपनी ने खुद अपने रेड हेरिंग…
डेयरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड (Milky Mist Dairy Food Ltd) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेशकों के लिए खुला है। लेकिन इस निवेश से पहले, कंपनी ने खुद अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में कुछ बड़े कारोबारी जोखिमों की जानकारी दी है। इनमें कच्चे माल के लिए एक ही राज्य पर निर्भरता, बिक्री का एक ही क्षेत्र में केंद्रित होना और करोड़ों रुपये की संभावित देनदारियां शामिल हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कंपनी ने बताया है कि उसकी सबसे बड़ी निर्भरता कच्चे दूध की खरीद के लिए तमिलनाडु पर है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल दूध खरीद का 94.5 प्रतिशत हिस्सा इसी राज्य से आया। इस वजह से तमिलनाडु में खराब मौसम, मवेशियों में कोई बीमारी, किसानों का विरोध-प्रदर्शन या किसी भी तरह की आपूर्ति में रुकावट कंपनी के उत्पादन और मुनाफे पर सीधा असर डाल सकती है।
बिक्री और उत्पादन से जुड़े जोखिम
सिर्फ़ खरीद ही नहीं, मिल्की मिस्ट की बिक्री भी एक ही भौगोलिक क्षेत्र पर बहुत ज्यादा निर्भर है। प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के ऑपरेशन से हुई कुल कमाई का 69.2 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण भारत से आया। कंपनी का मानना है कि इस इलाके में आर्थिक मंदी, प्रतिस्पर्धा बढ़ने या ग्राहकों की पसंद बदलने जैसी कोई भी घटना उसके कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, उत्पादन का एक ही जगह पर केंद्रित होना भी एक बड़ा जोखिम है। कंपनी का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तमिलनाडु के पेरुंदुरई में स्थित है। यहां मशीनरी खराब होने, किसी औद्योगिक दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कंपनी का कामकाज ठप पड़ सकता है।
₹229 करोड़ की संभावित देनदारियां
वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी ने 31 मार्च, 2026 तक लगभग ₹229 करोड़ की आकस्मिक देनदारियों (contingent liabilities) का खुलासा किया है। इसका मतलब है कि भविष्य में ये देनदारियां कंपनी को चुकानी पड़ सकती हैं।
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कुल रकम में से ₹195 करोड़ की सबसे बड़ी देनदारी एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) स्कीम से जुड़ी है। अगर कंपनी इस स्कीम के तहत निर्यात की शर्तें पूरी नहीं कर पाती है, तो उसे मिली हुई ड्यूटी छूट, ब्याज और जुर्माने के साथ वापस करनी पड़ सकती है। इसके अलावा, कंपनी इनपुट टैक्स क्रेडिट और क्लासिफिकेशन से जुड़े कई जीएसटी डिमांड का भी सामना कर रही है, जिन्हें उसने कानूनी तौर पर चुनौती दी है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2026 में उसकी कुल कमाई का 59.1% हिस्सा सिर्फ तीन उत्पादों— पनीर, चीज़ और दही— से आया, जो उत्पादों पर निर्भरता को भी दर्शाता है।
इनपुट: IANS



