सबरीमाला घी घोटाला: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका कैसे मिला? केरल के मंत्री ने उठाये सवाल
केरल के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में घी की खरीद और आपूर्ति में कथित अनियमितताओं का मामला गहराता जा रहा है। अब राज्य के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने इस मामले में एक व्यापक जांच की मांग की है…
केरल के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में घी की खरीद और आपूर्ति में कथित अनियमितताओं का मामला गहराता जा रहा है। अब राज्य के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने इस मामले में एक व्यापक जांच की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने बुधवार को गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को पत्र लिखकर एक काली सूची में डाली गई कंपनी को ठेका दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं और किसी बड़ी साजिश की आशंका व्यक्त की है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह घी सीधे तौर पर मंदिर के पवित्र प्रसाद, जैसे 'अरावना' और 'अप्पम', को बनाने में इस्तेमाल होता है। इसकी खरीद, गुणवत्ता या वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी के परिणाम सामान्य अनुबंध विवादों से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
जांच के दायरे से बाहर के पहलुओं पर ज़ोर
मंत्री मुरलीधरन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि देवस्वोम विजिलेंस एसपी और देवस्वोम सचिव की शुरुआती जांच से घी के सौदे में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। हालांकि, केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर एक स्पेशल विजिलेंस टीम पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन मंत्री ने उन पहलुओं की भी व्यापक जांच की मांग की है, जो अभी चल रही जांच के दायरे में शामिल नहीं हैं।
उन्होंने गृह विभाग से आग्रह किया है कि मामले के इन अनसुलझे पहलुओं की जांच का जिम्मा एक विशेष जांच दल को सौंपा जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उनकी मांग से मौजूदा विजिलेंस जांच में कोई दखलंदाज़ी न हो।
एक बड़ी साजिश की आशंका
देवस्वोम मंत्री के अनुसार, जिन परिस्थितियों में एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका दिया गया, उनकी बारीकी से पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फैसले को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता और यह खरीद प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार लोगों की किसी बड़ी साजिश में मिलीभगत की संभावना को जन्म देता है।
इस मांग के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक जांच के केंद्र में आ गया है। इससे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली ठेका प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही यह भी कि क्या मंदिर से जुड़ी संवेदनशील खरीद प्रक्रिया में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद थे।
इनपुट: IANS



