भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दमदार ग्रोथ, वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच 10.88% की दर से बढ़ा GVA
केंद्र सरकार ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत वृद्धि के आंकड़े पेश किए हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, संशोधित सीरीज के आंकड़ों के आधार पर स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग का सकल…
केंद्र सरकार ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत वृद्धि के आंकड़े पेश किए हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, संशोधित सीरीज के आंकड़ों के आधार पर स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग का सकल मूल्य वर्धन (GVA) वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के दौरान 10.88% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध डेटा देश की कुल GVA में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं देते हैं। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने के बाद सामने आई है। इस संशोधित सीरीज को फरवरी 2026 में जारी किया गया था।
विनिर्माण को मजबूत करने की सरकारी पहल
केंद्रीय मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने और बाहरी झटकों के प्रति इसकी सहनशीलता बढ़ाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार और योजनाएं लागू की हैं। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करना है।
प्रमुख सरकारी योजनाओं में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमें, पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति शामिल हैं। इसके अलावा, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या), सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, महत्वपूर्ण खनिजों और एमएसएमई को बढ़ावा देने की पहल भी की गई है।
भविष्य का लक्ष्य और रणनीति
मंत्री के अनुसार, इन सभी कोशिशों का मकसद आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी इस बदलाव का उल्लेख है, जिसके अनुसार भारत की मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू एडेड में मध्यम और उच्च-तकनीकी उद्योगों का योगदान अब 46.3% हो गया है। यह एक आधुनिक उत्पादन संरचना की ओर बढ़ते देश का संकेत है। इन सुधारों के दम पर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 2047 तक भारत को 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में एक प्रमुख विकास इंजन बना हुआ है।
इनपुट: IANS



