ब्रिक्स देश क्यों नहीं जुटा पा रहे निजी पूंजी? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई असल वजह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे ब्रिक्स देश वैश्विक विकास के मुख्य इंजन तो हैं, लेकिन वे सभी निजी पूंजी जुटाने में एक जैसी संरचनात्मक समस्याओं…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे ब्रिक्स देश वैश्विक विकास के मुख्य इंजन तो हैं, लेकिन वे सभी निजी पूंजी जुटाने में एक जैसी संरचनात्मक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जयपुर में आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि चुनौती सिर्फ पैसे की उपलब्धता की नहीं है, बल्कि एक भरोसेमंद और स्थिर माहौल बनाने की है।
बुधवार को यह सेमिनार "सदस्य देशों में प्राइवेट कैपिटल जुटाने में न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका" विषय पर आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम भारत की अध्यक्षता में हो रही ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक का हिस्सा था। अपने मुख्य भाषण में सीतारमण ने जोर दिया कि सदस्य देशों में निजी भागीदारी को लगातार बढ़ाने के लिए भरोसा, स्थिरता, अनुमान लगाने की क्षमता और एक भरोसेमंद दीर्घकालिक ढांचा बनाना ज़रूरी है।
भारत के अनुभव और सरकारी प्रयास
भारत के अनुभव का उदाहरण देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और ढांचागत सुधारों के जरिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को लगातार मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले की तुलना में हाईवे, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश काफी बढ़ा है।
सीतारमण ने स्पष्ट किया, "सरकार का मानना है कि पब्लिक कैपिटल को प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की जगह लेने के बजाय, उसे बढ़ावा देने का काम करना चाहिए।" इसी सिद्धांत के तहत सरकार ने कई सुधार किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF): आर्थिक रूप से कम आकर्षक लेकिन सामाजिक रूप से ज़रूरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता।
- हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM): सड़क जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में जोखिम को संतुलित तरीके से बांटने की व्यवस्था।
- क्रेडिट एन्हांसमेंट मैकेनिज्म: परियोजनाओं की बैंक से लोन लेने की क्षमता को बेहतर बनाना।
इसके अलावा, 'इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स' (इनविट्स) बनाने से पूंजी को दोबारा इस्तेमाल करने और लंबे समय के लिए संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली है।
भविष्य की योजना और बहुपक्षीय बैंकों की भूमिका
वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र के निवेश को और आसान बनाने के लिए कई खास उपाय किए गए हैं। इनमें नए डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू करने जैसी योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने के लिए बहुपक्षीय विकास बैंकों की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उनके मुताबिक, ये बैंक निवेश को जोखिम-मुक्त बनाने, परियोजनाओं की बैंक-योग्यता (bankability) बढ़ाने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि विकास के लिए वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है, जिसमें बहुपक्षीय संस्थाएं, राष्ट्रीय सरकारें और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें।
इनपुट: IANS



