शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मध्य-पूर्व तनाव के बीच IMEC कॉरिडोर की अहमियत बढ़ी, भारत से यूरोप तक व्यापार होगा सस्ता और तेज़

हाल के दिनों में मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में आई रुकावटों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की जरूरत को और भी पुख्ता कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक…

मध्य-पूर्व तनाव के बीच IMEC कॉरिडोर की अहमियत बढ़ी, भारत से यूरोप तक व्यापार होगा सस्ता और तेज़
(फोटो: IANS)

हाल के दिनों में मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में आई रुकावटों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की जरूरत को और भी पुख्ता कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट न केवल भारत और यूरोप के बीच व्यापार की तस्वीर बदल सकता है, बल्कि लॉजिस्टिक्स की लागत और समय में भी भारी कटौती ला सकता है।

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चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जवाब के तौर पर देखे जा रहे इस कॉरिडोर की घोषणा पिछले साल भारत में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इसका मकसद बंदरगाहों, रेलवे लाइनों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो भारत को खाड़ी देशों और इज़रायल के रास्ते यूरोप से सीधे जोड़ दे।

क्या है IMEC का प्रस्तावित रूट?

इस योजना के तहत, सामान भारत से समुद्री रास्ते से अरब प्रायद्वीप पहुंचेगा। वहां से ज़मीनी रास्ते पर सऊदी अरब और जॉर्डन होते हुए इज़रायल तक जाएगा, और फिर हाइफा बंदरगाह के माध्यम से यूरोप के लिए रवाना होगा। यह मार्ग खतरनाक समुद्री रास्तों और इराक, सीरिया व लेबनान जैसे अस्थिर क्षेत्रों से बचकर निकलेगा, जिससे व्यापार सुरक्षित और सुगम होगा।

लागत और समय में भारी बचत

रिपोर्ट में हाल के अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि IMEC के पूरी तरह चालू हो जाने पर भारत और यूरोप के बीच माल ढुलाई का समय 40% तक घट सकता है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग 30% की कमी आने का अनुमान है। आंकड़ों के अनुसार, एक स्टैंडर्ड कंटेनर को भेजने का खर्च मौजूदा 6,000 डॉलर से घटकर करीब 4,200 डॉलर रह जाएगा। अनुमान है कि मामूली ट्रैफिक पर भी सालाना सिर्फ माल ढुलाई में ही 2.7 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।

इज़रायल की भूमिका और क्षेत्रीय प्रभाव

हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह प्रोजेक्ट फिलहाल रुका हुआ है, लेकिन फारस की खाड़ी और लाल सागर में पैदा हुई बाधाओं ने सभी संबंधित देशों के लिए इसकी अहमियत बढ़ा दी है। अगर यह गलियारा सफल होता है, तो इज़रायल का हाइफा पोर्ट पूर्वी भूमध्यसागर में एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र बन सकता है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में इज़रायल की विशेषज्ञता बेंगलुरु से बर्लिन तक फैली सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगी।

इनपुट: IANS

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