शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

Svatantra Microfin IPO: 3000 करोड़ जुटाने की तैयारी, पर DRHP में सामने आईं ये 7 बड़ी चुनौतियां

उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला की बेटी अनन्या बिरला की कंपनी स्वतंत्र माइक्रोफिन लिमिटेड 3,000 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…

Svatantra Microfin IPO: 3000 करोड़ जुटाने की तैयारी, पर DRHP में सामने आईं ये 7 बड़ी चुनौतियां
(फोटो: IANS)

उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला की बेटी अनन्या बिरला की कंपनी स्वतंत्र माइक्रोफिन लिमिटेड 3,000 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास जमा कराए गए अपने मसौदा दस्तावेजों (DRHP) में कई ऐसे जोखिमों का खुलासा किया है, जिन पर निवेशकों को गौर करने की जरूरत है। ये जोखिम कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और परिचालन से जुड़े हैं।

विज्ञापन

प्रस्तावित आईपीओ में 1,500 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत 1,500 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री करेंगे। कंपनी के पास 300 करोड़ रुपये तक के प्री-आईपीओ प्लेसमेंट का विकल्प भी है, जिससे नए इश्यू का आकार घट सकता है।

कर्ज, नकदी और कमाई से जुड़ी चिंताएं

असुरक्षित ऋणों पर निर्भरता: कंपनी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक असुरक्षित (unsecured) लोन पर इसकी भारी निर्भरता है। 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों (AUM) का 88.56% हिस्सा ऐसे ही माइक्रोफाइनेंस ऋणों का था, जिनके बदले कोई गारंटी नहीं ली जाती। कंपनी मुख्य रूप से उन परिवारों को कर्ज देती है, जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है। यह वर्ग आर्थिक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, जिससे कर्ज वापसी का जोखिम बना रहता है।

बढ़ता नकद बहिर्वाह (Cash Outflow): कंपनी की नकदी की स्थिति भी एक चिंता का विषय है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन गतिविधियों में इस्तेमाल हुई शुद्ध नकदी तेजी से बढ़कर 5,392.6 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले सिर्फ 427 करोड़ रुपये थी। यह लगभग 1,160% की भारी वृद्धि है। कंपनी के अनुसार, इसका कारण लोन बुक का तेजी से विस्तार है और यह स्थिति भविष्य में भी बनी रह सकती है।

परिचालन और प्रशासनिक जोखिम

कैश कलेक्शन पर निर्भरता: डिजिटल दौर में भी कंपनी का कलेक्शन काफी हद तक नकदी पर आधारित है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल संग्रह का 79.22% हिस्सा कैश में आया। कंपनी ने खुद माना है कि नकदी लेनदेन में धोखाधड़ी, चोरी और धन के दुरुपयोग का खतरा होता है।

कुछ राज्यों तक सीमित कारोबार: स्वतंत्र माइक्रोफिन का कारोबार भौगोलिक रूप से कुछ ही राज्यों में केंद्रित है। कंपनी के कुल AUM का लगभग 68% हिस्सा सिर्फ पांच राज्यों—बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश—से आता है। इन राज्यों में किसी भी तरह की आर्थिक, राजनीतिक या प्राकृतिक आपदा का सीधा असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

कर्मचारियों का टिकना मुश्किल: माइक्रोफाइनेंस एक श्रम-प्रधान उद्योग है, और कंपनी को अपने कर्मचारियों को बनाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कर्मचारी नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 39.22% थी, जो पिछले वर्ष 41.47% थी। यह लगातार ऊंची दर एक बड़ी चुनौती का संकेत है।

कानूनी और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे

ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा: कंपनी एक कानूनी विवाद में भी फंसी है। रत्नाफिन कैपिटल और रत्नाफिन एंटरप्राइज ने दिल्ली हाईकोर्ट में कंपनी पर ट्रेडमार्क और लोगो के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

प्रमोटर के अनुभव पर सवाल: डीआरएचपी में यह भी बताया गया है कि कंपनी के कॉर्पोरेट प्रमोटर, एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, के पास माइक्रोफाइनेंस कारोबार का पर्याप्त अनुभव नहीं है। यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन बेहद अहम होता है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →