IPO लाने की तैयारी में शिपरॉकेट: कंपनी पर 4 आपराधिक केस और टैक्स विवादों का साया
ई-कॉमर्स कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की सुविधा देने वाला प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट जल्द ही अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की तैयारी में है। हालांकि, शेयर बाजार में कदम रखने से पहले कंपनी ने…
ई-कॉमर्स कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की सुविधा देने वाला प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट जल्द ही अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की तैयारी में है। हालांकि, शेयर बाजार में कदम रखने से पहले कंपनी ने अपने ड्राफ्ट पेपर में कई कानूनी और कर संबंधी विवादों का खुलासा किया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों पर कई मामले लंबित हैं, जिनमें धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
कंपनी द्वारा दाखिल किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, शिपरॉकेट पर कुल चार आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें दावा की गई राशि 5.39 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, कंपनी दो अन्य आपराधिक कार्यवाहियों और सात कर विवादों का भी सामना कर रही है। वहीं, इसकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ भी एक आपराधिक और तीन टैक्स से जुड़े मामले लंबित हैं, जिनमें कुल 2.34 करोड़ रुपए की राशि दांव पर है।
सह-संस्थापकों समेत शीर्ष अधिकारियों पर भी केस
इन मामलों में एक सबसे अहम केस साल 2022 में दर्ज किया गया था, जिसमें कंपनी के सह-संस्थापक साहिल गोयल और गौतम कपूर के साथ-साथ निदेशक अर्जुन सेठी और मुख्य वित्तीय अधिकारी कुमार तनमय को भी आरोपी बनाया गया है। इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।
घाटे के बावजूद राजस्व में बढ़ोतरी
अगर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो शिपरॉकेट अभी भी घाटे में चल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 79.2 करोड़ रुपए रहा, जो इससे पिछले साल के 74.4 करोड़ रुपए के घाटे से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2023-24 में हुए 595.1 करोड़ रुपए के भारी घाटे की तुलना में एक बड़ा सुधार है।
घाटे के बावजूद, कंपनी के राजस्व में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन से होने वाली आय 24% बढ़कर 2,024.1 करोड़ रुपए हो गई, जो कारोबार के विस्तार का एक सकारात्मक संकेत है।
कंपनी के सामने मौजूद चुनौतियां और जोखिम
शिपरॉकेट ने अपने दस्तावेज़ों में साफ किया है कि व्यापारियों का आधार बढ़ाने, नए उत्पाद विकसित करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश करने और उभरते व्यवसायों के विस्तार पर हो रहे खर्चों के कारण निकट भविष्य में उसकी कमाई पर दबाव बना रह सकता है। कंपनी अपनी सेवाओं के लिए तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर बहुत अधिक निर्भर है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल खर्च का लगभग 69.4% हिस्सा मर्चेंट सॉल्यूशन की लागत का था। इसके अलावा, ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती है।
इनपुट: IANS



