शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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RBI के सुधारों से बैंकिंग सेक्टर को मिल सकती है 50 अरब डॉलर की पूंजी, जानें पूरी रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया नियामकीय सुधारों और तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के उपायों से देश के बैंकिंग सेक्टर में भारी पूंजी आने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक रिपोर्ट के…

RBI के सुधारों से बैंकिंग सेक्टर को मिल सकती है 50 अरब डॉलर की पूंजी, जानें पूरी रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया नियामकीय सुधारों और तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के उपायों से देश के बैंकिंग सेक्टर में भारी पूंजी आने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन कदमों से भारतीय बैंकिंग प्रणाली में करीब 50 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आ सकती है, जिससे बैंकों की आर्थिक स्थिति और नकदी दोनों को मजबूती मिलेगी।

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शुक्रवार को जारी कंसल्टिंग फर्म यूनिकस कंसलटेक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। RBI का लक्ष्य इन सुधारों के जरिए बैंकिंग प्रणाली को पहले से ज़्यादा सुरक्षित, मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

पूंजी प्रवाह बढ़ाने वाले प्रमुख कदम

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इनमें 'एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा' और अनिवासी भारतीयों (NRI) की जमा दरों पर अस्थायी सीमा हटाना शामिल है। इन उपायों से बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने की लागत (हेजिंग कॉस्ट) कम हुई है, जिससे वे जमाकर्ताओं को बेहतर ब्याज दरें दे पा रहे हैं। यही वजह है कि विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ रहा है।

यूनिकस कंसलटेक के मुताबिक, बैंक RBI की एफसीएनआर(बी) जमा योजना के तहत अब तक 36.7 अरब डॉलर जुटा चुके हैं। उद्योग जगत के अनुमानों की मानें तो इस विशेष सुविधा की समयसीमा खत्म होने से पहले यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

बैंकिंग रेगुलेशन का नया दौर

यूनिकस कंसलटेक के पार्टनर सागर लखानी ने कहा, "एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा जैसे तरलता समर्थन उपाय जहां विदेशी पूंजी को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भविष्य आधारित क्रेडिट-रिस्क प्रावधान और एआई गवर्नेंस नियमों की शुरुआत आरबीआई की उस रणनीति को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य अधिक लचीली और भविष्य के लिए तैयार बैंकिंग प्रणाली का निर्माण करना है।"

रिपोर्ट बताती है कि RBI अब सिर्फ पारंपरिक निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक ढांचे पर काम कर रहा है। इसमें पूंजी प्रबंधन, लोन का जोखिम, ग्राहक सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से जुड़े नियम भी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अपेक्षित क्रेडिट नुकसान (ECL) और संशोधित बेसल III जैसे नियम हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से हैं।

अर्थव्यवस्था के बाहरी मोर्चे पर भी सुधार के संकेत

इस बीच, एक अन्य रिपोर्ट में भी भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति में सुधार का अनुमान जताया गया है। इसके अनुसार, देश का पूंजी खाता अधिशेष (Capital Account Surplus) बढ़कर लगभग 108 अरब डॉलर हो सकता है, जो पिछले साल सिर्फ 2 अरब डॉलर था। साथ ही, यह भी अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) 64 अरब डॉलर के फायदे में पहुंच सकता है, जबकि पिछले दो वित्त वर्षों में यह घाटे में रहा था।

इनपुट: IANS

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