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नौकरियों की बहार: 2031 तक भारत में 1380 नए ग्लोबल सेंटर खुलने की उम्मीद, राज्यों में निवेश खींचने की होड़

भारत में वैश्विक कंपनियों के दफ्तर, जिन्हें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) कहा जाता है, तेजी से बढ़ रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2031 तक देश में लगभग 1,380 नए जीसीसी स्थापित होने और इनसे 11.8…

नौकरियों की बहार: 2031 तक भारत में 1380 नए ग्लोबल सेंटर खुलने की उम्मीद, राज्यों में निवेश खींचने की होड़
(फोटो: IANS)

भारत में वैश्विक कंपनियों के दफ्तर, जिन्हें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) कहा जाता है, तेजी से बढ़ रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2031 तक देश में लगभग 1,380 नए जीसीसी स्थापित होने और इनसे 11.8 लाख रोजगार पैदा होने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS को यह जानकारी रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई साउथ एशिया की एक रिपोर्ट से मिली है।

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इस तेज़ ग्रोथ के पीछे राज्यों की विशेष नीतियां एक बड़ा कारण हैं। कई राज्य इन वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं, ताकि उनके यहां निवेश आए और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।

राज्यों में निवेश खींचने की होड़

रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और गुजरात जैसे राज्यों ने जीसीसी के लिए खास नीतियां लागू की हैं। वहीं, तेलंगाना, दिल्ली और तमिलनाडु भी प्रोत्साहन योजनाओं के ज़रिए इस सेक्टर को बढ़ावा दे रहे हैं। केरल भी अपनी जीसीसी नीति का मसौदा तैयार कर चुका है।

सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमन मैगज़ीन ने कहा, “राज्य सरकारों द्वारा जीसीसी के लिए समर्पित नीतियां इतनी तेजी से अपनाना भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव है। अब जीसीसी केवल सेवा क्षेत्र का एक हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्यों की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।”

ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग

जीसीसी की बढ़ती संख्या का सीधा असर देश के कमर्शियल रियल एस्टेट बाज़ार पर दिख रहा है। 2022 से 2026 की पहली छमाही के बीच, इन सेंटरों ने भारत के नौ बड़े शहरों में 12.3 करोड़ वर्गफुट से ज़्यादा ऑफिस स्पेस लीज़ पर लिया है।

आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल ऑफिस लीज़िंग में जीसीसी की हिस्सेदारी 2022 के 29% से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में लगभग 43% हो गई है। इनमें टेक्नोलॉजी (23%), बैंकिंग-वित्तीय सेवाएं (22%), और इंजीनियरिंग-विनिर्माण (16%) सेक्टरों का सबसे बड़ा योगदान रहा, जो कुल लीज़िंग का 60% से अधिक है।

सिर्फ प्रोत्साहन काफी नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ़ छूट या पैकेज तक सीमित नहीं है। सीबीआरई के मैनेजिंग डायरेक्टर राम चंदनानी के अनुसार, “बेहतर बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन की क्षमता भी अहम भूमिका निभा रही है।” यही वजह है कि स्थापित महानगरों के अलावा अब छोटे शहर भी जीसीसी निवेश के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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