सोमवार, 31 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भवानी मंडी निकाय चुनाव: नामांकन के आखिरी दिन BJP को झटका, वरिष्ठ नेता रामलाल गुर्जर कांग्रेस में शामिल

राजस्थान के भवानी मंडी नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने…

भवानी मंडी निकाय चुनाव: नामांकन के आखिरी दिन BJP को झटका, वरिष्ठ नेता रामलाल गुर्जर कांग्रेस में शामिल
(फोटो: IANS)

राजस्थान के भवानी मंडी नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन पार्टी छोड़कर अपनी बहू समेत कांग्रेस का दामन थाम लिया है। गुर्जर करीब 40 वर्षों से भाजपा के साथ जुड़े हुए थे।

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रामलाल गुर्जर के साथ उनकी बहू और पूर्व अध्यक्ष पिंकी गुर्जर एवं पूर्व सांसद सुगना गुर्जर ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर डग्ग विधानसभा क्षेत्र के उपाध्यक्ष चेतन गहलोत, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रॉड सिंह परमार और नगर निगम कांग्रेस अध्यक्ष विनय अस्तोलिया ने स्कार्फ पहनाकर सभी नेताओं का पार्टी में स्वागत किया। कांग्रेस में शामिल होने पर रामलाल गुर्जर ने कहा कि उन्हें पार्टी से सम्मान और स्नेह मिला, इसीलिए उन्होंने यह फैसला किया।

चुनाव से पहले बदले समीकरण

भवानी मंडी नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं और इन चुनावों में मुकाबला काफी कड़ा होने की उम्मीद है। तीन प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में जाने से स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिससे कई वार्डों में त्रिकोणीय या चौतरफा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

बोर्ड गठन में नौ वार्डों की अहम भूमिका

इस चुनाव में नौ वार्ड ऐसे हैं जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनकर उभरे हैं। इन वार्डों के परिणाम नगर निगम बोर्ड के गठन के लिए जरूरी सदस्यों की संख्या तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इनमें वार्ड संख्या 4, 12, 14, 17, 26 और 33 प्रमुख हैं। दोनों प्रमुख दल, भाजपा और कांग्रेस, इन वार्डों में ऐसे मजबूत उम्मीदवारों को उतारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो न केवल जीतें बल्कि बोर्ड गठन में भी पार्टी की स्थिति मजबूत कर सकें।

उम्मीदवारों की सूची में देरी और विद्रोह की आशंका

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सोमवार थी, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने अपने सभी उम्मीदवारों की सूची जारी करने में देरी की। खबरों के मुताबिक, यह एक रणनीति का हिस्सा है ताकि टिकट वितरण से होने वाले संभावित विद्रोह और आंतरिक असहमति को कम किया जा सके। यह भी उम्मीद है कि पार्टी से टिकट न मिलने वाले कई नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे मुकाबला और भी अप्रत्याशित हो जाएगा। इस बार 45 वार्डों में 250 से ज्यादा उम्मीदवारों के मैदान में उतरने का अनुमान है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजस्थान डेस्क

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