बेंगलुरु निकाय चुनाव: कर्नाटक सरकार ने फिर मांगी मोहलत, मतदाता सूची पुनरीक्षण का दिया हवाला
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत नगर निगमों के चुनाव कराने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से और समय मांगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार ने मतदाता सूची के
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत नगर निगमों के चुनाव कराने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से और समय मांगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का हवाला देते हुए चुनावों को 31 दिसंबर 2026 तक टालने की अपील की है, जबकि शीर्ष अदालत ने पहले ही 31 अगस्त तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का सख्त निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने अपनी अर्जी में दलील दी है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के काम में बड़ी संख्या में अधिकारी लगे हुए हैं, जिस वजह से चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि जीबीए चुनावों के लिए करीब 56,000 अधिकारियों की जरूरत होती है, जिनमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) भी शामिल हैं। ये सभी अधिकारी फिलहाल घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्रों का वितरण, संग्रह और सत्यापन कर रहे हैं। बेंगलुरु में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जिनके विवरण को इस प्रक्रिया के तहत अद्यतन किया जा रहा है।
चुनाव में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार ने चुनाव टालने की कोशिश की है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर कर्नाटक सरकार पर नाराजगी जता चुका है। अदालत ने सरकार की "देरी की रणनीति" पर कड़ी फटकार लगाते हुए 31 अगस्त की अंतिम समयसीमा तय की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट कहा था कि इस तारीख के बाद और मोहलत नहीं दी जाएगी।
सरकार का पक्ष और राजनीतिक तैयारी
इस मामले पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि सरकार अदालत के निर्देशों का सम्मान करती है, लेकिन SIR अभियान के कारण व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। उन्होंने कहा, "अदालत ने हमें प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। एसआईआर अभियान के कारण कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। मैंने यह मामला अधिकारियों पर छोड़ दिया है।" साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक राजनीतिक दल के तौर पर वे चुनाव के लिए तैयार हैं।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी अधिनियम के तहत, GBA के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों के लिए चुनाव होने हैं, जो काफी समय से लंबित हैं। अब गेंद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के पाले में है कि वह सरकार की इस नई अपील पर क्या रुख अपनाता है।
इनपुट: IANS



