दिल्ली के शख्स से ₹17 लाख की ठगी, जांच में इंदौर के बड़े फ़र्ज़ी इन्वेस्टमेंट कॉल सेंटर का पर्दाफ़ाश
दिल्ली के एक व्यक्ति से हुई 17.30 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की जांच करते हुए पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। समाचार एजेंसी IANS के…
दिल्ली के एक व्यक्ति से हुई 17.30 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की जांच करते हुए पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह गिरोह एक प्रतिष्ठित ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर एक अवैध कॉल सेंटर चला रहा था, जो शेयर बाजार और फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर निवेशकों को अपना शिकार बनाता था।
दिल्ली पुलिस की द्वारका साइबर सेल ने इस मामले में इंदौर से छह लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब उत्तम नगर निवासी सुनील कुमार ने 5 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई कि कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करने के लिए उकसाया। शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में निवेश कराकर उनका भरोसा जीता गया और फिर फॉरेक्स ट्रेडिंग में पैसा लगाने के लिए राजी कर लिया गया।
ऐसे काम करता था ठगी का नेटवर्क
आरोपी पीड़ितों को नकली मुनाफ़ा दिखाकर लगातार और ज़्यादा रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते थे। पुलिस जांच में पता चला कि यह गिरोह अवैध तरीकों से उन लोगों का डेटा हासिल करता था जो पहले से शेयर बाजार में निवेश करते हैं। इसके बाद कॉलर उन्हें फोन कर पहले भारतीय बाजार और फिर एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के जाल में फंसाते थे। जब निवेशक अपना पैसा निकालने की कोशिश करते, तो आरोपी तरह-तरह के बहाने बनाते और अंत में ट्रेडिंग में भारी नुकसान दिखाकर उनकी सारी जमा-पूंजी हड़प लेते थे। सुनील कुमार के साथ भी यही हुआ, जिन्होंने 30 मार्च 2026 से लगातार निवेश किया था।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
शिकायत के आधार पर द्वारका साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई। डीसीपी कुशल पाल सिंह और अतिरिक्त डीसीपी विकास मीणा के निर्देशन में पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों के इंदौर में होने का पता लगाया। इसके बाद एक विशेष टीम ने इंदौर के सदर बाजार थाना क्षेत्र में छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया।
छापेमारी में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान सुमित सिंह चौधरी (23), राहुल सिंह (32), अश्विनी कुमार (35), महेश सिंह (32), पियूष राठौर (27) और रविंदर सिंह चौहान (24) के रूप में हुई है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दो से चार महीने से यहां काम कर रहे थे और उन्हें 10,000 से 14,500 रुपये महीने के वेतन के अलावा ठगी की रकम का 10% कमीशन भी मिलता था।
हज़ारों निवेशकों का डेटा ज़ब्त
मौके से पुलिस ने 28 सीपीयू, 25 मोबाइल फोन और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सीपीयू से 1,400 से ज़्यादा एक्सेल शीट मिली हैं, जिनमें हजारों लोगों के नाम, पैन, मोबाइल नंबर और बैंक खातों जैसी संवेदनशील जानकारी मौजूद है। बरामद डेटा के विश्लेषण से इस गिरोह के तार महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और बिहार समेत कई राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं, जिनमें कुल 54.70 लाख रुपये से अधिक की ठगी हुई है।
इनपुट: IANS



