गुरूवार, 13 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत की ऊर्जा क्षमता में बड़ा बदलाव: 12 साल में दोगुनी, 54% हिस्सा अब गैर-जीवाश्म स्रोतों से

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जहाँ देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2014 के मुकाबले दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

भारत की ऊर्जा क्षमता में बड़ा बदलाव: 12 साल में दोगुनी, 54% हिस्सा अब गैर-जीवाश्म स्रोतों से
(फोटो: IANS)

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जहाँ देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2014 के मुकाबले दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 तक भारत की कुल ऊर्जा क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट पहुँच गई है, जो 2014 में महज़ 249 गीगावाट थी। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuels) यानी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का है।

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देश की कुल ऊर्जा क्षमता में अब 54% से अधिक हिस्सा (300.50 गीगावाट) गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा का है। यह आँकड़ा भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।

सौर ऊर्जा में भारत की लंबी छलाँग

नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भारत अब दुनिया में तीसरे स्थान पर है। इसमें सौर ऊर्जा की भूमिका सबसे अहम रही है। 2014 में जहाँ देश की सौर ऊर्जा क्षमता सिर्फ़ 2.8 गीगावाट थी, वहीं जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 164.59 गीगावाट हो गई है। फैक्टशीट के अनुसार, “सोलर अब भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा है।” 2025 में भारत 37 गीगावाट से ज़्यादा क्षमता जोड़कर अमेरिका (34 गीगावाट) को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया।

इसी दिशा में, सरकार की 'पीएम-सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना' भी अहम साबित हो रही है। इस योजना के तहत 12 अगस्त, 2026 तक 51.58 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिससे लगभग 19 लाख घरों का बिजली बिल शून्य हो गया है। लाभार्थियों को अब तक 28,024 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा चुकी है।

पवन ऊर्जा और कोयले की स्थिति

सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा (Wind Energy) भी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मिशन का एक मज़बूत स्तंभ है। 58.14 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ भारत इस क्षेत्र में दुनिया में चौथे स्थान पर है। वित्त वर्ष 2025–26 में देश ने 6.05 गीगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो अब तक की सर्वाधिक वार्षिक वृद्धि है। इसके अलावा, पवन टरबाइन निर्माण की घरेलू क्षमता भी 2014 में 10 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग 24 गीगावाट हो गई है।

इन सबके बावजूद, भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की भूमिका अब भी निर्णायक बनी हुई है। देश की प्राथमिक ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग 55% और बिजली उत्पादन का 70% से ज़्यादा हिस्सा कोयले से ही पूरा होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता है, जिसका उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 609.18 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,040.08 मिलियन टन हो गया।

इनपुट: IANS

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News4Social टेक डेस्क

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