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डिजिलॉकर और उमंग पर करोड़ों यूजर्स: भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार कैसे हो रहा है?

भारत सरकार के दो प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म— डिजिलॉकर और उमंग — तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन पर करोड़ों की संख्या में नागरिक पंजीकृत हैं और अरबों लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के…

डिजिलॉकर और उमंग पर करोड़ों यूजर्स: भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार कैसे हो रहा है?
(फोटो: IANS)

भारत सरकार के दो प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म— डिजिलॉकर और उमंग — तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन पर करोड़ों की संख्या में नागरिक पंजीकृत हैं और अरबों लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी।

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डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इन प्लेटफॉर्म्स का उद्देश्य नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को आसान बनाना है। ये दोनों प्लेटफॉर्म मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के रूप में उपलब्ध हैं, जिससे लोग कहीं से भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

डिजिलॉकर और उमंग के आंकड़ें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि डिजिलॉकर पर पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 72.43 करोड़ से अधिक हो गई है। पिछले तीन वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर 72.86 करोड़ बार दस्तावेज़ों का लेनदेन (एक्सेस) किया गया है। वहीं, उमंग (UMANG) प्लेटफॉर्म पर भी 11.66 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं और पिछले तीन सालों में इस पर लगभग 798 करोड़ लेनदेन हुए हैं।

कौन-सी सेवाएं हैं उपलब्ध?

31 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, उमंग प्लेटफॉर्म पर केंद्र और राज्य सरकारों की कुल 2,575 सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें से 880 सेवाएं केंद्र सरकार की और 1,695 सेवाएं विभिन्न राज्य सरकारों की हैं।

इसी तरह, डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर 5,437 प्रकार के दस्तावेज़ और सेवाएं मौजूद हैं। इनमें 661 केंद्र सरकार से और 4,776 राज्य सरकारों से संबंधित हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को आधार, ई-साइन और एपीआई सेतु जैसे अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया है, ताकि सुरक्षित प्रमाणीकरण और दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन आसानी से हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच

मंत्री ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क को भी मजबूत किया है। 30 जून तक देश भर में ग्राम पंचायत स्तर पर 4,07,122 कॉमन सर्विस सेंटर काम कर रहे थे। खास बात यह है कि इनमें से 70,069 सेंटर महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो डिजिटल समावेशन और महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है। ये केंद्र सरकारी सेवाओं के साथ-साथ बैंकिंग, बीमा और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं भी देते हैं।

वैष्णव ने कहा कि ये सभी प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा हैं, जिसके तहत तकनीक के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाया जा रहा है। जुलाई 2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का लक्ष्य डिजिटल सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाना है।

इनपुट: IANS

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News4Social टेक डेस्क

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