गुरूवार, 13 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

भारत का अंतरिक्ष सेक्टर नई उड़ान पर: 440 स्टार्टअप्स और निजी रॉकेट लॉन्च की तैयारी

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, जिससे इस सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में वर्तमान में लगभग 440…

भारत का अंतरिक्ष सेक्टर नई उड़ान पर: 440 स्टार्टअप्स और निजी रॉकेट लॉन्च की तैयारी
(फोटो: IANS)

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, जिससे इस सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में वर्तमान में लगभग 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते नवाचार और निवेश का स्पष्ट संकेत है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय निजी कंपनियां अगले दो वर्षों में आठ से अधिक वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च करने की योजना बना रही हैं।

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर ये 440 स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं। यह आंकड़ा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने की सरकारी नीति की सफलता को दर्शाता है।

इन-स्पेस से मिली मंजूरी

निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें नियंत्रित करने वाली नोडल एजेंसी, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe), ने अब तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं को कुल 113 मंजूरियां दी हैं। खास बात यह है कि इनमें से 18 मंजूरियां स्टार्टअप्स को मिली हैं, जिन्हें देश के उभरते निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम का अगुआ माना जा रहा है।

इन-स्पेस से मंजूरी पाने वाले कुछ प्रमुख स्टार्टअप्स में अग्निकुल कॉसमॉस, स्काईरूट एयरोस्पेस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, पिक्सल स्पेस इंडिया, ध्रुवा स्पेस, और स्पेस किड्ज इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा अक्षत एयरोस्पेस, दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज, और गैलेक्सीआई स्पेस सॉल्यूशंस को भी अधिकृत किया गया है।

रॉकेट लॉन्च और इसरो की भूमिका

आने वाले वर्षों में निजी रॉकेट लॉन्च की गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान दो निजी रॉकेट लॉन्च प्रस्तावित हैं। इसके बाद, वित्त वर्ष 2027-28 के लिए छह से अधिक रॉकेट लॉन्च की संभावना है, हालांकि इस कार्यक्रम को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी कंपनियों को इसरो (ISRO) के बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की अनुमति एक तय प्रक्रिया के तहत दी जाती है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड जैसे संसाधनों के लिए मिले आवेदनों का मूल्यांकन इन-स्पेस के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक विशेषज्ञ समिति करती है, जो तकनीकी और परिचालन तैयारी को देखती है।

इनपुट: IANS

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