शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

अगस्त में भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार, सर्विस सेक्टर की मजबूती से निजी क्षेत्र में लौटी रौनक

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगस्त का महीना राहत भरी खबर लेकर आया है। सेवा क्षेत्र (Services Sector) में आई तेजी की बदौलत देश की निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में एक बार फिर सुधार देखने को मिला…

अगस्त में भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार, सर्विस सेक्टर की मजबूती से निजी क्षेत्र में लौटी रौनक
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगस्त का महीना राहत भरी खबर लेकर आया है। सेवा क्षेत्र (Services Sector) में आई तेजी की बदौलत देश की निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में एक बार फिर सुधार देखने को मिला है। समाचार एजेंसी IANS से मिले आंकड़ों के मुताबिक, एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई के 54.3 से बढ़कर अगस्त में 54.6 पर पहुंच गया। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और आर्थिक गतिविधियां लगातार विस्तार कर रही हैं।

विज्ञापन

पीएमआई (Purchasing Managers' Index) 50 से ऊपर होना कारोबारी गतिविधियों में विस्तार या तेजी को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन या गिरावट का संकेत देता है। इस लिहाज से 54.6 का स्तर एक स्वस्थ वृद्धि की ओर इशारा कर रहा है।

सर्विस सेक्टर बना ग्रोथ का इंजन

इस सुधार का सबसे बड़ा श्रेय सर्विस सेक्टर को जाता है, जिसने जुलाई में पिछले 53 महीनों की सबसे कमजोर वृद्धि दर्ज करने के बाद शानदार वापसी की है। अगस्त में सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों और नए ऑर्डरों में फिर से तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। हालांकि, इसके विपरीत विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में 52.9 दर्ज किया गया, जो वृद्धि तो दर्शा रहा है, लेकिन पिछले वर्षों के मुकाबले यह गति कुछ नरम रही।

रोजगार और निर्यात के मोर्चे पर अच्छी खबर

रोजगार के मोर्चे पर अगस्त के आंकड़े काफी सकारात्मक रहे। निजी क्षेत्र में नई नौकरियां देने की रफ्तार जून 2025 के बाद के संयुक्त रूप से सबसे तेज स्तर पर पहुंच गई। इसका मुख्य कारण भी सर्विस सेक्टर ही रहा, जहां कंपनियों ने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा कर्मचारियों को काम पर रखा। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "कुल निजी क्षेत्र उत्पादन वृद्धि लगभग स्थिर बनी रही, जिसे सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों से समर्थन मिला।" उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और कमजोर हुई और यह पिछले 5 वर्षों की सबसे धीमी सुधार दर रही।

निर्यात के मोर्चे पर भी भारतीय कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। अमेरिका, जर्मनी, चीन, सिंगापुर और जापान जैसे प्रमुख बाजारों से मांग मजबूत बनी रही, जिससे निर्यात ऑर्डर में sólida वृद्धि हुई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में निर्यात वृद्धि की गति जुलाई के मुकाबले थोड़ी धीमी रही।

लागत का दबाव घटा, लेकिन कीमतें बढ़ीं

कंपनियों के लिए लागत के मोर्चे पर कुछ राहत मिली है। अगस्त में इनपुट लागत का दबाव कम हुआ और कुल लागत मुद्रास्फीति पिछले सात महीनों के सबसे निचले स्तर पर आ गई। इसके बावजूद, कई कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालना जारी रखा, जिसके चलते बिक्री कीमतों में वृद्धि की दर अप्रैल के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। आने वाले वर्ष के लिए कंपनियों का कारोबारी विश्वास भी मजबूत हुआ है, क्योंकि उन्हें बाजार की स्थितियों और मांग में लगातार सुधार की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →