शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव, शुरुआती बढ़त के बाद फिसले सेंसेक्स-निफ्टी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को, लगातार दूसरे सत्र में बढ़त के सा…

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव, शुरुआती बढ़त के बाद फिसले सेंसेक्स-निफ्टी
(फोटो: IANS)

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को, लगातार दूसरे सत्र में बढ़त के साथ शुरुआत की। हालांकि, शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी और बाजार जल्द ही लाल निशान में फिसल गया।

विज्ञापन

समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 163.35 अंक (0.21%) चढ़कर 77,701.07 पर खुला। दिन के कारोबार में यह 187.95 अंकों की बढ़त के साथ 77,725.67 के उच्चतम स्तर तक भी पहुंचा, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के दबाव में 77,445.86 के निचले स्तर तक भी गिरा। इसी तरह, निफ्टी 50 भी 52.20 अंक (0.22%) की मजबूती के साथ 24,284.05 पर खुला। दिन के दौरान इसका उच्चतम स्तर भी 24,284.05 रहा, जबकि इसका निचला स्तर 24,206.80 दर्ज किया गया।

सेक्टरों का मिला-जुला प्रदर्शन

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। रियल्टी, मेटल और फार्मा सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को शुरुआती समर्थन मिला। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा 0.7% की तेजी रही। इसके बाद निफ्टी मेटल 0.48% और निफ्टी फार्मा 0.32% मजबूत हुए।

वहीं दूसरी ओर, आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.6% की गिरावट के साथ सबसे कमजोर क्षेत्र रहा। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 0.19% की कमजोरी दर्ज की गई। व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी स्मॉलकैप में 0.73% की बढ़त रही, जबकि निफ्टी मिडकैप में 0.20% की गिरावट देखी गई।

बाजार पर बाहरी दबाव और विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कारकों का असर घरेलू बाजार पर दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना एक बड़ी चिंता है, जिससे बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। दरअसल, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के एक बयान के बाद तेल की कीमतों में यह तेजी आई, जिसमें उन्होंने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।

हालांकि, विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेत और संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है। उनका कहना है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, फार्मा और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। तकनीकी रूप से, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निफ्टी 24,000-24,060 के सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है, तो इसमें आगे तेजी देखने को मिल सकती है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →