बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय कार बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की धूम, पहली तिमाही में रजिस्ट्रेशन 90% बढ़े

भारत में इलेक्ट्रिक कारों (EV) की मांग में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगभग 90 प्रतिशत बढ़क

भारतीय कार बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की धूम, पहली तिमाही में रजिस्ट्रेशन 90% बढ़े
(फोटो: IANS)

भारत में इलेक्ट्रिक कारों (EV) की मांग में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगभग 90 प्रतिशत बढ़कर 82,737 यूनिट पर पहुँच गया। समाचार एजेंसी IANS ने वाहन पोर्टल के आंकड़ों के हवाले से बताया है कि पिछले साल इसी अवधि में यह आँकड़ा 43,710 यूनिट था।

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बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस तेज़ बढ़ोतरी के पीछे एक बड़ी वजह पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईंधन की कीमतों में आए उछाल ने ग्राहकों को कम परिचालन लागत (रनिंग कॉस्ट) वाले बैटरी-चालित वाहनों की ओर आकर्षित किया।

किस कंपनी ने बेचीं कितनी गाड़ियाँ?

इस तिमाही में इलेक्ट्रिक कार बाज़ार में टाटा मोटर्स का दबदबा कायम रहा। कंपनी ने 32,283 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए, जो पिछले साल के 15,794 यूनिट की तुलना में 104% की शानदार वृद्धि है। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुना कर दिया। कंपनी ने इस तिमाही में 20,112 यूनिट्स का पंजीकरण कराया, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 10,144 थी।

हालांकि, हुंडई मोटर इंडिया के लिए यह तिमाही अच्छी नहीं रही। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रजिस्ट्रेशन 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गया।

मांग बढ़ने के अन्य कारण

ईवी की मांग ऐसे समय में बढ़ी है जब कई पारंपरिक वाहन बनाने वाली कंपनियाँ अपनी गाड़ियों के दाम बढ़ा रही हैं। उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमतों और परिचालन खर्च में वृद्धि का हवाला देते हुए टाटा मोटर्स, हुंडई, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों ने हाल के महीनों में अपनी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की रनिंग कॉस्ट स्थिर बनी रही, जिसने बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित किया। हर महीने मांग में लगातार मजबूती देखी गई, जो अप्रैल में 24,963 यूनिट से बढ़कर जून में 30,454 यूनिट तक पहुँच गई।

इनपुट: IANS

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