तमिलनाडु में टीबी उन्मूलन की मुहिम: इस साल अब तक मिले 48,000 से ज़्यादा मरीज़, सरकार ने तेज की निगरानी
तमिलनाडु में तपेदिक (टीबी) को जड़ से खत्म करने के प्रयासों के बीच इस साल के पहले छह महीनों में 48,469 नए मरीज़ों की पहचान की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने इन सभी मरीज़ों…
तमिलनाडु में तपेदिक (टीबी) को जड़ से खत्म करने के प्रयासों के बीच इस साल के पहले छह महीनों में 48,469 नए मरीज़ों की पहचान की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने इन सभी मरीज़ों का इलाज शुरू कर दिया है और टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने गुरुवार को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की एक समीक्षा बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य तमिलनाडु को टीबी मुक्त बनाना है, जिसके लिए निगरानी व्यवस्था को और मज़बूत किया जा रहा है। पिछले पूरे साल, यानी 2025 में, राज्य में कुल 93,203 टीबी मरीज़ों की पहचान हुई थी।
बीमारी की जल्द पहचान और रोकथाम पर ज़ोर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बीमारी की शुरुआती पहचान सबसे ज़रूरी है। इसके लिए संक्रमण के ज़्यादा खतरे वाले गांवों और शहरी वार्डों में सक्रिय जांच अभियान और तेज किए जाएँगे। उन्होंने अधिकारियों को मरीज़ों की पहचान बढ़ाने, इलाज के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने और कार्यक्रम से जुड़े सभी विभागों में समन्वय मज़बूत करने के निर्देश दिए।
मंत्री अरुणराज ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि टीबी मरीज़ों के करीबी संपर्क में आए लोगों को एहतियाती इलाज उपलब्ध कराया जाए। उनका मानना है कि समय पर बचाव उपचार देने से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सकता है और बीमारी का बोझ काफी कम हो सकता है। इसके अलावा, गंभीर रूप से बीमार टीबी मरीज़ों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
समुदायिक भागीदारी को बताया ज़रूरी
राज्य की सफलताओं का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में तमिलनाडु की 2,390 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य अभियानों और सामुदायिक प्रयासों का नतीजा बताया। केजी अरुणराज ने स्पष्ट किया कि इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि इसमें निजी अस्पतालों, गैर-सरकारी संगठनों और आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी बेहद अहम है।
इनपुट: IANS



