मैन्युफैक्चरिंग की तेज़ रफ़्तार, भारत का औद्योगिक उत्पादन जुलाई में 6.7% बढ़ा
भारत की औद्योगिक गतिविधियों में इस साल जुलाई में शानदार तेज़ी देखने को मिली है, जिसका नेतृत्व विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सांख्यिकी…
भारत की औद्योगिक गतिविधियों में इस साल जुलाई में शानदार तेज़ी देखने को मिली है, जिसका नेतृत्व विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आँकड़ों से पता चलता है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में जुलाई 2026 के दौरान साल-दर-साल 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
औद्योगिक उत्पादन को मापने वाले इस सूचकांक में सबसे बड़ी और लगभग तीन-चौथाई हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र ने 7.3 प्रतिशत की मज़बूत बढ़त हासिल की। यह क्षेत्र न केवल औद्योगिक विकास की रीढ़ है, बल्कि रोज़गार सृजन का एक प्रमुख ज़रिया भी माना जाता है।
किन उद्योगों का प्रदर्शन रहा सबसे दमदार?
विनिर्माण क्षेत्र के भीतर 23 में से 19 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में विद्युत उपकरण (28.3% वृद्धि), मोटर वाहन (22.2% वृद्धि), और मशीनरी व उपकरण निर्माण (12.1% वृद्धि) शामिल रहे। ऊर्जा क्षेत्र में भी 8.7 प्रतिशत की मज़बूत बढ़त देखी गई, जबकि खनन एकमात्र ऐसा प्रमुख क्षेत्र रहा जिसमें 0.9 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई।
निवेश और उपभोक्ता मांग में भी उछाल
आँकड़े अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश और उपभोक्ता विश्वास का भी संकेत देते हैं। उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, कैपिटल गुड्स (फ़ैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें) का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ा, जिसे भविष्य के आर्थिक विकास के लिए एक अच्छा संकेत माना जाता है। इसी तरह, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (जैसे टीवी, फ्रिज) के उत्पादन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालाँकि, रोज़मर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं (उपभोक्ता गैर-टिकाऊ) के उत्पादन में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बुनियादी ढाँचे पर सरकारी ख़र्च का असर
सरकारी निवेश का लाभ भी आँकड़ों में साफ़ दिखा। राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे जैसी परियोजनाओं पर ज़ोर देने से बुनियादी ढाँचा और निर्माण सामग्री क्षेत्र ने 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस बीच, सांख्यिकी मंत्रालय ने यह भी घोषणा की है कि उसने IIP की गणना पद्धति में एक अहम बदलाव किया है। अब कुछ वस्तुओं के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आँकड़े और सटीक हो सकेंगे।
इनपुट: IANS



