दुबई बना भारतीय कारोबार का नया गढ़, जून 2026 तक 85,000 से ज़्यादा कंपनियाँ हुईं पंजीकृत
भारत और दुबई के बीच आर्थिक साझेदारी एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है, जहाँ दुबई भारतीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुबई…
भारत और दुबई के बीच आर्थिक साझेदारी एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है, जहाँ दुबई भारतीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुबई चैंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता ने बताया कि जून 2026 के अंत तक चैंबर के साथ पंजीकृत सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 85,841 हो गई है।
यह आंकड़ा दुबई के प्रति भारतीय कारोबारी समुदाय के गहरे विश्वास को दर्शाता है। अकेले वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही 7,579 नई भारतीय कंपनियों ने दुबई चैंबर की सदस्यता ली, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत की वृद्धि है। लूता ने इस बात पर जोर दिया कि ये आँकड़े दुबई और उसके भविष्य के विकास के अवसरों में भारतीय निवेशकों के मजबूत भरोसे को प्रमाणित करते हैं।
व्यापार और निवेश के मजबूत होते रिश्ते
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है। वर्ष 2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसमें सालाना 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लूता के मुताबिक, पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार 136.2 प्रतिशत बढ़ा है, जो 2016 के 25.6 अरब डॉलर से बढ़कर अब 60 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। इस वृद्धि के साथ ही भारत अब दुबई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।
निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर काफी सकारात्मक है। दुबई ने 2016 से 2025 के बीच भारत से लगभग 8.8 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। इसमें से 2.3 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सिर्फ 2025 में आया। यह निवेश केवल एकतरफा नहीं है; दुबई की कंपनियों ने भी भारत में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इसी अवधि में, दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं में 9.3 अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे 55,274 रोजगार के अवसर पैदा हुए।
भविष्य की साझेदारी और CEPA की भूमिका
मोहम्मद अली राशिद लूता ने कहा कि दोनों देशों के संबंध पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अब नई प्रौद्योगिकियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों तक फैल रहे हैं। एजेंटिक एआई और तकनीकी नवाचार में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियाँ मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए दुबई को अपने संचालन केंद्र के रूप में उपयोग कर रही हैं।
इस साझेदारी को मजबूत करने में भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस समझौते ने व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार पहुंच को बेहतर बनाने और विकास के नए रास्ते खोलने में मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार, दुबई का विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल इसे भारतीय कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाता है।
इनपुट: IANS



