शनिवार, 29 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729 अरब डॉलर के पार, बनाया अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह अब तक के अपने सर्वोच्च स्तर 729.33 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। समाचार…

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729 अरब डॉलर के पार, बनाया अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
(फोटो: IANS)

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह अब तक के अपने सर्वोच्च स्तर 729.33 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में इसमें 12.4 अरब डॉलर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने फरवरी 2026 में बने 728.5 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

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यह उछाल रिज़र्व बैंक द्वारा हाल के महीनों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का नतीजा है। जून 2026 में शुरू की गई विशेष योजनाओं, जैसे प्रवासी भारतीयों के लिए विशेष जमा कार्यक्रम, के माध्यम से 21 अगस्त तक देश में 72.8 अरब डॉलर का निवेश आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ भंडार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा।

भंडार के सभी हिस्सों में बढ़ोतरी

विदेशी मुद्रा भंडार के मुख्य घटकों में व्यापक वृद्धि देखी गई। सबसे बड़ा हिस्सा, यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA), 9.482 अरब डॉलर बढ़कर 591.333 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। इसी तरह, देश के सोने के भंडार (Gold Reserves) में भी 2.801 अरब डॉलर का इज़ाफ़ा हुआ और यह 114.218 अरब डॉलर हो गया।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से जुड़े भारत के भंडार में भी मजबूती आई। IMF के पास भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) 112 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.852 अरब डॉलर हो गई, जबकि IMF में भारत की रिज़र्व ट्रेंच पोजीशन 26 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.925 अरब डॉलर पर पहुँच गई।

अर्थव्यवस्था और रुपए के लिए इसका क्या मतलब है?

विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर होना देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती देता है। यह भारत के भुगतान संतुलन को सुदृढ़ करता है और देश को लगातार तीसरे साल संभावित घाटे से बचाने में मददगार साबित हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, यह भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति और निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि इस तरह विदेशी पूंजी आकर्षित करने की एक लागत भी होती है, क्योंकि RBI को बैंकों की हेजिंग लागत वहन करनी पड़ती है। यह भंडार RBI को रुपए की स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिक ताकत देगा, जो हाल के महीनों में एशिया की कमजोर मुद्राओं में से एक रहा है। मई 2026 के निचले स्तर से रुपया अब तक लगभग 1.7 प्रतिशत सुधर चुका है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी उस पर दबाव बनाए हुए हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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