सोने-चांदी के जड़ाऊ गहनों की चमक बढ़ी, वैश्विक सुस्ती के बावजूद भारत का ज्वेलरी निर्यात 9 अरब डॉलर के पार
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग की अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने चालू वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी…
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग की अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने चालू वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई 2026) में भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 9.17 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2.44% अधिक है।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से वैल्यू-एडेड यानी अतिरिक्त कारीगरी वाले उत्पादों, खासकर जड़े हुए सोने और चांदी के आभूषणों की मजबूत मांग के कारण हुई है। रुपए के संदर्भ में देखें तो यह वृद्धि और भी प्रभावशाली है। इस दौरान कुल निर्यात 13.58% बढ़कर 87,078.01 करोड़ रुपए हो गया। अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग और ब्रिटेन जैसे प्रमुख बाजारों ने भारतीय आभूषणों की मांग को सहारा दिया, जिससे निर्यातकों को काफी फायदा हुआ।
किस श्रेणी का कैसा रहा प्रदर्शन?
चांदी और जड़ाऊ सोने के गहनों की धूम: इस अवधि में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन जड़े हुए सोने और चांदी के आभूषणों का रहा। चांदी के आभूषणों के निर्यात में 72.19% की जबरदस्त उछाल देखी गई, जिससे यह 508.18 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, जड़े हुए सोने के गहनों का निर्यात भी 21.09% बढ़कर 2.24 अरब डॉलर हो गया। कुल मिलाकर, सादे और जड़ाऊ दोनों तरह के सोने के गहनों का निर्यात 5.87% बढ़कर 4.03 अरब डॉलर रहा।
लैब-ग्रोन डायमंड्स और प्लैटिनम में भी वृद्धि: अन्य श्रेणियों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात 7.47% बढ़कर 408.50 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि प्लैटिनम ज्वेलरी का निर्यात 17.20% की वृद्धि के साथ 77.82 मिलियन डॉलर रहा।
कटे-पॉलिश और सादे सोने के हीरों में गिरावट
हालांकि, सभी श्रेणियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कटे और पॉलिश किए हुए हीरों (Cut & Polished Diamonds) के निर्यात में 8% की गिरावट आई और यह 3.60 अरब डॉलर पर आ गया। इसी तरह, सादे सोने के आभूषणों का निर्यात भी 8.46% घटकर 1.80 अरब डॉलर रह गया। इस गिरावट का कारण वैश्विक उपभोक्ता मांग में बदलाव और कुछ प्रमुख बाजारों में आर्थिक दबाव को माना जा रहा है।
उद्योग का भविष्य और सरकारी नीतियां
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा, "चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है।" उन्होंने विश्वास जताया कि वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग भविष्य में उद्योग के विकास की प्रमुख वजह बनेगी। भंसाली के अनुसार, हाल ही में आईआईजेएस भारत प्रीमियर 2026 प्रदर्शनी में हुए कारोबारी समझौते आने वाले महीनों में निर्यात ऑर्डर में बदलेंगे, जिससे उद्योग को और गति मिलेगी। इस प्रदर्शनी में 80 देशों के 5,000 से अधिक खरीदारों सहित कुल 61,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था।
उन्होंने हाल ही में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 का भी स्वागत किया। इसके तहत रफ डायमंड का कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को 15 साल की आयकर छूट मिलेगी, जिससे भारत एक वैश्विक हीरा व्यापार केंद्र के रूप में भी उभर सकता है।
इनपुट: IANS



