गुरूवार, 13 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल: ISI के लिए जासूसी का आरोप, गिरफ्तार पाक नागरिक ने ऐसे बनवाए थे भारतीय पहचान पत्र

पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार एक पाकिस्तानी नागरिक के बारे में जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच के अनुसार, आरोपी ने एक सह-आरोपी के पिता के नाम और दस्तावेजों का…

पश्चिम बंगाल: ISI के लिए जासूसी का आरोप, गिरफ्तार पाक नागरिक ने ऐसे बनवाए थे भारतीय पहचान पत्र
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार एक पाकिस्तानी नागरिक के बारे में जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच के अनुसार, आरोपी ने एक सह-आरोपी के पिता के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके आधार और पैन कार्ड जैसे भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिए थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने का आरोप है।

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गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान वहाब आलम के रूप में हुई है, जिसे उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा से पकड़ा गया था। जांच से पता चला है कि आलम 2012 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह लंबे समय तक पूर्वी कोलकाता के टोपसिया इलाके में अपने सहयोगी मोहम्मद इजाज के घर पर रहा। यहीं पर उसने इजाज के पिता के दस्तावेजों का उपयोग कर अपने लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाए।

जासूसी का नेटवर्क और नेपाल कनेक्शन

STF अधिकारियों को आलम के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और EPIC (वोटर आईडी) कार्ड मिले हैं। इन सभी दस्तावेजों में पिता के नाम की जगह मोहम्मद इजाज के पिता का नाम दर्ज था। जांचकर्ताओं का मानना है कि आलम इन दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने की फिराक में था, ताकि वह अपनी पहचान पूरी तरह छिपा सके।

आलम को ISI ने भारत के पूर्वी क्षेत्र में सेना, नौसेना और रेलवे से जुड़ी संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी साजिश में नेपाल एक अहम कड़ी था। आलम 2012 में नेपाल के रास्ते ही भारत में घुसा था, जहां एक मस्जिद में उसकी मुलाकात इजाज से हुई। हल्दिया में रहने के दौरान भी वह अक्सर नेपाल आता-जाता था, जहां उसका एक छोटा फ्रेंचाइजी कारोबार भी है।

कैसे नाकाम हुई पासपोर्ट बनवाने की योजना

आलम की भारतीय पासपोर्ट बनवाने की योजना पश्चिम बंगाल में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के कारण सफल नहीं हो सकी। उसके दस्तावेजों में 'तार्किक विसंगति' पाए जाने पर ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) ने उसे सुनवाई के लिए बुलाया था। लेकिन वह सुनवाई में शामिल होने के बजाय उत्तर 24 परगना के हाबरा भाग गया, जहां से वह बांग्लादेश भागने की कोशिश में था, लेकिन उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया।

STF ने यह भी पता लगाया है कि आलम अपने ISI हैंडलर्स से संपर्क में रहने के लिए कई प्रीपेड सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। ये सभी सिम कार्ड उसने अपने फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के जरिए हासिल किए थे। हर कुछ बातचीत के बाद वह पुराने सिम को नष्ट कर देता था और संपर्क के लिए नया सिम कार्ड ले लेता था।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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