अगले वित्त वर्ष भारत 7.3% तक बढ़ सकता है, निजी निवेश बनेगा अर्थव्यवस्था की नई ताकत: डेलॉइट रिपोर्ट
भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है, जिसके लिए ज़मीन तैयार हो चुकी है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 7.1 से 7.3 प्रतिशत की…
भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है, जिसके लिए ज़मीन तैयार हो चुकी है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 7.1 से 7.3 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है, जिसका नेतृत्व अब सरकारी खर्च के साथ-साथ निजी क्षेत्र का बढ़ता निवेश और मजबूत घरेलू मांग करेगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह आकलन कंसल्टिंग फर्म डेलॉइट इंडिया ने अपनी ताज़ा 'इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट में शुक्रवार को जारी किया है।
रिपोर्ट बताती है कि पिछले दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार मुख्य रूप से सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और आम लोगों की खपत रही है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बेहतर कारोबारी माहौल, कंपनियों की मजबूत वित्तीय स्थिति और उत्पादन क्षमता के बढ़ते इस्तेमाल से एक ऐसा मंच तैयार हुआ है, जहां निजी निवेश अर्थव्यवस्था को और गति दे सकता है।
निवेश में तेज़ी के संकेत
डेलॉइट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि हालिया आर्थिक संकेतक निजी निवेश में तेज़ी आने की ओर इशारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछले चार वर्षों में सबसे तेज़ बढ़त है, जो कारोबार जगत के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निजी पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी से न केवल मांग का एक नया स्रोत बनेगा, बल्कि यह देश की उत्पादन क्षमता को भी लंबे समय के लिए बढ़ाएगा। वित्त वर्ष 2028 के लिए भी 6.6 से 7.0 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
रणनीतिक क्षेत्रों पर रहेगा ज़ोर
डेलॉइट का मानना है कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश से निजी पूंजी को और बढ़ावा मिल सकता है। इन उद्योगों में शुरुआत में बड़े निवेश की ज़रूरत होती है, लेकिन ये भविष्य में विकास के बड़े अवसर प्रदान करते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ जोखिमों के प्रति आगाह भी किया गया है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली रुकावटें भारत के आर्थिक विकास के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
अन्य एजेंसियों का भी यही अनुमान
वित्त वर्ष 2027 के लिए डेलॉइट का 7.1-7.3% का अनुमान अन्य प्रमुख संस्थानों के आकलन से काफी मेल खाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और OECD ने 7.1% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि IMF, एशियाई विकास बैंक (ADB), एसएंडपी और मूडीज जैसी एजेंसियों ने भी लगभग 7% की वृद्धि की उम्मीद जताई है।
इनपुट: IANS



