सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यस बैंक पर बढ़ा दबाव, ब्रोकरेज फर्मों ने घटाई रेटिंग और शेयर गिरे
यस बैंक के शेयरों में शुक्रवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला है जिसमें उसने बैंक के 8,415 करोड़ रुपए के 'एडिशनल…
यस बैंक के शेयरों में शुक्रवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला है जिसमें उसने बैंक के 8,415 करोड़ रुपए के 'एडिशनल टियर-1' (AT-1) बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने (राइट-ऑफ) के निर्णय को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने बैंक की वित्तीय सेहत को लेकर चिंता जताते हुए सतर्क रुख अपना लिया है, जिसका सीधा असर इसके शेयर की कीमतों पर पड़ा।
दोपहर 3 बजे तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यस बैंक का शेयर 2.21% की गिरावट के साथ 17.72 रुपए पर कारोबार कर रहा था।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 जनवरी, 2023 के फैसले के खिलाफ दायर की गई थीं। हाई कोर्ट ने मार्च 2020 में बैंक की पुनर्गठन योजना के दौरान बट्टे खाते में डाले गए AT-1 बॉन्ड्स को बहाल करने का आदेश दिया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने भी बरकरार रखा है।
ब्रोकरेज फर्मों की चिंता और रेटिंग
इस अदालती फैसले के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने यस बैंक को लेकर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस पर दोबारा विचार किया है। सिटी (Citi) ने बैंक पर अपनी 'बिकवाली' की रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस घटाकर 17.50 रुपए कर दिया है। इसी तरह, मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भी 'अंडरवेट' रेटिंग को बरकरार रखते हुए 17 रुपए का टारगेट प्राइस तय किया है।
बैंक की पूंजी और बुक वैल्यू पर असर
ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से बैंक की पूंजी और बुक वैल्यू पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। सिटी के विश्लेषण के अनुसार, AT-1 बॉन्ड की देनदारी बहाल होने से यस बैंक के 'कॉमन इक्विटी टियर 1' (CET1) कैपिटल रेशियो में 250 आधार अंकों की कमी आ सकती है, जिससे यह 11.5% तक गिर सकता है। यह अनुमान केवल मूल राशि पर आधारित है। इसके अलावा, इस देनदारी से बैंक की बुक वैल्यू में 13-14% तक की गिरावट का भी अनुमान है। इस स्थिति में बैंक को अपने कैपिटल बफर को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटानी पड़ सकती है।
इनपुट: IANS



