सोने-चांदी के निर्यात पर मिलने वाला सरकारी रिफंड घटा, निर्यातकों के मुनाफे पर पड़ सकता है असर
केंद्र सरकार ने सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती धातु उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाले वित्तीय लाभ में कटौती कर दी है। सरकार ने इन उत्पादों पर दी जाने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों को कम कर दिया…
केंद्र सरकार ने सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती धातु उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाले वित्तीय लाभ में कटौती कर दी है। सरकार ने इन उत्पादों पर दी जाने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों को कम कर दिया है, जिसका सीधा असर निर्यातकों के मार्जिन पर पड़ने की आशंका है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोने के आभूषणों पर रिफंड में 3.1 प्रतिशत की कमी की गई है, जबकि चांदी के उत्पादों पर यह कटौती करीब 9 प्रतिशत तक है।
ड्यूटी ड्रॉबैक एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत सरकार निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए कच्चे माल पर लगे शुल्क (कस्टम ड्यूटी आदि) को निर्यातकों को वापस कर देती है। इसका मकसद वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाना और लागत का बोझ कम करना होता है।
कितनी कम हुई रिफंड की दरें
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने के आभूषणों के निर्यात पर मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉबैक अब 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दिया गया है। वहीं, चांदी के आभूषणों और अन्य वस्तुओं पर यह दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभाव ज्वैलरी निर्यातकों, बुलियन कारोबारियों और बड़ी मात्रा में आभूषण निर्यात करने वाली कंपनियों पर पड़ेगा।
कुछ महीने पहले ही बढ़ाई गई थीं दरें
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार ने इसी साल जुलाई में निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए इन दरों में भारी बढ़ोतरी की थी। उस समय वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सोने पर रिफंड 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम किया गया था। इसी तरह, चांदी पर दर 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई थी।
उद्योग के जानकारों का मानना है कि कम रिफंड मिलने से निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग मजबूत बनी रहती है तो इसका असर सीमित हो सकता है, लेकिन अल्पावधि में यह कारोबारियों के लिए एक चुनौती साबित हो सकता है।
इनपुट: IANS



