‘रिजीम चेंज’ वाले बयान पर राजनीतिक घमासान, किरेन रिजिजू ने ‘गद्दारों’ को लेकर किया ट्वीट
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की वकालत करने वाले बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए…
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की वकालत करने वाले बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘गद्दारों को कभी माफ नहीं करना चाहिए’। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रशांत भूषण का एक वीडियो साझा करते हुए यह टिप्पणी की।
साझा किए गए वीडियो में प्रशांत भूषण एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुले तौर पर 'रिजीम चेंज' की मांग को स्वीकार करते हुए कहते हैं, “हां, हम रिजीम चेंज चाहते हैं।” इसी संदर्भ में रिजिजू ने अपने पोस्ट में लिखा, “प्यारे देशभक्त भारतीयों, याद रखें, 'अपने दुश्मनों को एक बार माफ करो, दोस्तों को दो बार, लेकिन गद्दारों को कभी नहीं'।”
रक्षा मंत्री ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि ‘रिजीम चेंज’ शब्द का इस्तेमाल यह दिखाता है कि प्रदर्शनकारियों का मकसद अराजकता फैलाकर सत्ता पर कब्जा करना है। उन्होंने कहा, “विपक्ष की लड़ाई न तो चुनाव आयोग के लिए है और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए, बल्कि उसका एकमात्र मकसद अव्यवस्था पैदा करके सत्ता हासिल करना है।”
राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए सत्ता परिवर्तन की वकालत करने वालों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लाइसेंस के तौर पर नहीं किया जा सकता और नेताओं को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
'दिमागी नक्सल बनाम देशभक्त भारतीय'
किरेन रिजिजू ने इस सियासी लड़ाई को और कड़े शब्दों में परिभाषित किया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “लड़ाई की रेखा खिंच गई है। यह दिमागी नक्सल बनाम देशभक्त भारतीय है।” इससे पहले उन्होंने प्रशांत भूषण का 2011 का एक पुराना वीडियो भी साझा किया था, जिसमें उन्हें कश्मीर पर यह कहते हुए सुना गया था कि “अगर कश्मीरी लोग अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें अलग होने दें।” सत्ताधारी दल के नेता इस पूरे मामले को सरकार अस्थिर करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
इनपुट: IANS



