त्योहारी सीज़न से ठीक पहले गोल्ड ETF में नया निवेश क्यों रुका? जानिए पूरी जानकारी
त्योहारी मौसम, जब भारत में सोने की खरीदारी पारंपरिक रूप से ज़ोर पकड़ती है, उससे ठीक पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने निवेशकों के लिए एक अहम फैसला लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार से कई…
त्योहारी मौसम, जब भारत में सोने की खरीदारी पारंपरिक रूप से ज़ोर पकड़ती है, उससे ठीक पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने निवेशकों के लिए एक अहम फैसला लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार से कई फंड हाउस ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के फंड-ऑफ-फंड्स (FoF) में हर तरह का नया निवेश अस्थायी तौर पर रोक दिया है।
यह रोक एकमुश्त (lumpsum) निवेश, नए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रजिस्ट्रेशन और मौजूदा SIP में टॉप-अप जैसी अतिरिक्त निवेश सुविधाओं पर लागू होगी। कुछ कंपनियों ने तो स्विच-इन और नए सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) पर भी पाबंदी लगा दी है। निवेशकों को भेजे गए नोटिस में इसे एक अस्थायी कदम बताया गया है जो अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
सबसे ज़रूरी बात यह है कि जिन निवेशकों के SIP और STP पहले से चल रहे हैं, उनकी किस्तें पहले की तरह ही कटती रहेंगी। कंपनियों ने साफ़ किया है कि रोक लगने से पहले पंजीकृत हो चुके सभी व्यवस्थित निवेश लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसी तरह, अगर कोई निवेशक अपने पैसे निकालना (रिडेम्प्शन) या किसी दूसरी स्कीम में स्विच-आउट करना चाहता है, तो उस पर भी कोई रोक नहीं है।
फैसले के पीछे क्या है कारण?
फंड हाउसों ने अपने नोटिस में इस रोक का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। हालांकि, IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एक फंड हाउस ने यह ज़रूर बताया कि यह कदम नियामक स्तर पर हुई चर्चा के बाद उद्योग जगत से मिले निर्देशों के तहत उठाया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब दशहरा और दिवाली के आसपास सोने की मांग बढ़ जाती है। भारत अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है, जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये पर भी दबाव आता है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में संघर्ष को देखते हुए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी।
इनपुट: IANS



