शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत, विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटा: जेफरीज रिपोर्ट

भारत की मजबूत होती आर्थिक बुनियाद और कर्ज की बढ़ती मांग के बीच विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार पर लौट रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक निवेश फर्म जेफरीज के…

भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत, विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटा: जेफरीज रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

भारत की मजबूत होती आर्थिक बुनियाद और कर्ज की बढ़ती मांग के बीच विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार पर लौट रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक निवेश फर्म जेफरीज के इक्विटी स्ट्रेटजी हेड क्रिस्टोफर वुड ने अपने ताजा 'ग्रीड एंड फियर' नोट में भारत को लेकर बेहद सकारात्मक रुख दोहराया है।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में 2.45 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक टेक्नोलॉजी से जुड़े शेयरों में अपना पैसा निकाल रहे थे। वुड के मुताबिक, बेहतर होते व्यापक आर्थिक संकेतकों के कारण भारत उभरते बाजारों में सबसे अलग खड़ा है।

कर्ज और मांग में जोरदार तेजी

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक बड़ा संकेत बैंक कर्ज में हुई बढ़ोतरी है। साल 2026 के दौरान बैंक लोन की वृद्धि दर सालाना आधार पर 17-18 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे तेज रफ्तार है।

इस विस्तार का सबसे बड़ा चालक कॉरपोरेट लोन रहा है, जिसमें सालाना करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, कृषि और खुदरा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज में भी क्रमशः 17% और 16% की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल और आवासीय संपत्तियों की मांग भी बाजार में मजबूत बनी हुई है, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है।

रुपये को मिलेगा सहारा

क्रिस्टोफर वुड ने उन कदमों का भी जिक्र किया जिनसे आने वाले समय में भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जून में शुरू की गई गैर-निवासी भारतीयों के लिए विदेशी मुद्रा जमा योजना उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

इस योजना के तहत अब तक करीब 41 अरब डॉलर का निवेश आ चुका है और अगले दो महीनों में यह राशि 80 से 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही, सरकार ने विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड से होने वाली ब्याज आय पर टैक्स छूट देने का फैसला किया है। इस कदम से सरकारी लोन बाजार को पहले ही समर्थन मिला है और इससे विदेश से अतिरिक्त पूंजी आने की उम्मीद है। इन सभी वजहों से रुपये के स्थिर होने की संभावना बढ़ गई है।

इनपुट: IANS

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