भारतीय कंपनियों के लिए शानदार रही तिमाही, बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने मुनाफे में लगाई ऊंची छलांग
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए उम्मीद से कहीं बेहतर साबित हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हुए नुकसान के बावजूद…
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए उम्मीद से कहीं बेहतर साबित हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हुए नुकसान के बावजूद, बैंकिंग, मेटल, आईटी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों के दमदार प्रदर्शन ने कंपनियों के मुनाफे को नई ऊंचाई दी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार को जहां कंपनियों के मुनाफे में 10% की गिरावट की आशंका थी, वहीं कुल आय में 2% की वृद्धि दर्ज की गई।
यह विश्लेषण ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (एमओएफएसएल) ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर तेल कंपनियों के घाटे को हटाकर देखें, तो भारतीय कंपनियों की आय में साल-दर-साल 17% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूत बुनियाद को दर्शाता है। यह विश्लेषण उन कंपनियों पर आधारित है जो प्रमुख क्षेत्रों के कुल अनुमानित मुनाफे का लगभग 70% हिस्सा रखती हैं।
किन सेक्टरों ने किया दमदार प्रदर्शन?
इस तिमाही के नतीजों में बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र (BFSI) का योगदान सबसे अहम रहा, जिसकी आय में सालाना 20% की बढ़ोतरी हुई। सबसे शानदार प्रदर्शन मेटल सेक्टर का रहा, जिसने 53% की वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के मुनाफे में 11% और ऑटोमोबाइल सेक्टर में 7% की बढ़त देखी गई। जिन 39 निफ्टी कंपनियों ने अब तक अपने नतीजे घोषित किए हैं, उनके मुनाफे में औसतन 11% की वृद्धि हुई है, जबकि बाजार की उम्मीद सिर्फ 7% थी।
छोटी-मझोली कंपनियों का हाल
बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप) ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में 6% की वृद्धि दर्ज की। वहीं, मिड-कैप कंपनियों की आय में 31% की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण तेल विपणन कंपनियों का घाटा रहा। हालांकि, अगर इन तेल कंपनियों को अलग कर दिया जाए, तो मिड-कैप की आय में वास्तव में 25% की वृद्धि हुई है। इस तिमाही की सबसे बड़ी विजेता स्मॉल-कैप (छोटी) कंपनियां रहीं, जिनकी आय में 32% का प्रभावशाली उछाल आया।
कुछ क्षेत्रों पर रहा दबाव
हालांकि, सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कुछ क्षेत्रों में मांग की चुनौतियों के कारण तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) क्षेत्रों पर आय का सबसे अधिक दबाव देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले समय में बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकते हैं।
इनपुट: IANS



